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kanta roy's Discussions (2,219)

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"नींव ढहती है तब मरासिम की जब यकीं दरम्यां से उठता है...... वाह ! क्या बात है ! बहुत…"

kanta roy replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"यहाँ हर अशआर के अपने अलग रंग ओ मिजाज़ बन पड़े है । बहुत ही शानदार गजल हुई है यह । बध…"

kanta roy replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"बहुत खूब लिखा है आपने कि ---- आदमी बोझ बांधकर, आखिर छोड़ सबकुछ,जहां से उठता है.....…"

kanta roy replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"बहुत ही शानदार गजल हुई है आपकी आदरणीय गंगाधर जी । बधाई !"

kanta roy replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"हर एक शेर मिजाज़ बेहद गम्भीर किस्म का , स्वंय में एक विस्तार लिये है । कई - कई बार प…"

kanta roy replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"क्यूँ बिछाते हो तुम सफ़-ए-मातम जब कोइ दरमियाँ से उठता है------ वाह ! क्या खूबसूरत गजल…"

kanta roy replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"शेर दर शेर लाजवाब बन पडे है यहाँ आपकी इस गजल में । बधाई कबूल फरमाईयेगा ।"

kanta roy replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"पीर का ताप सर पे चढ़ता जब। तेज़ तूफ़ाँ यहाँ से उठता है।।....... वाह ! वाह ! क्या ताप का…"

kanta roy replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"ताक़तें झूठ को मयस्सर तो सच कहाँ नातवाँ से उठता है।----- इस शेर के साथ ही एकदम से बेह…"

kanta roy replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

""सिद्धिर्भवति कर्मजा"- practice is the best policy for perfection---------शत-प्रतिशत…"

kanta roy replied Jan 9, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-63

466 Jan 10, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

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