For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

विवेक मिश्र's Discussions (159)

Discussions Replied To (152) Replies Latest Activity

"गणेश भाई! कल रात आपसे 'चैट' के बाद कुछ लिखने का मूड हुआ.. और बस.. लिख दिया. आज आपकी…"

विवेक मिश्र replied May 5, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ७ (Now Closed)

355 May 8, 2011
Reply by Admin

"धन्यवाद सर जी!!"

विवेक मिश्र replied May 5, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ७ (Now Closed)

355 May 8, 2011
Reply by Admin

"  /ख़्वाब में तुम मेरे आती जाती रहीं, रात भर नींद में गुनगुनाता रहा।/- मासूम ख़याल. कि…"

विवेक मिश्र replied May 5, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ७ (Now Closed)

355 May 8, 2011
Reply by Admin

"धन्यवाद धर्मेन्द्र जी. :-)"

विवेक मिश्र replied May 5, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ७ (Now Closed)

355 May 8, 2011
Reply by Admin

"सुबह, शाम और रात..   एक सुबह थी.. जब सपने में देख रहा था तुम्हें ही छुप-छुपकर और फ…"

विवेक मिश्र replied May 5, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ७ (Now Closed)

355 May 8, 2011
Reply by Admin

"आँखों में सुर्खी औ सोये नहीं हैं कहते हैं यूँ तो हम खोये नहीं हैं कसर नहीं थी तुम्हा…"

विवेक मिश्र replied May 5, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ७ (Now Closed)

355 May 8, 2011
Reply by Admin

"किसी की याद आये और आंसू भी ना गिरें, ऐसा कैसे हो सकता है.. भावनाओं की सुन्दर प्रस्तु…"

विवेक मिश्र replied May 5, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ७ (Now Closed)

355 May 8, 2011
Reply by Admin

"/प्यार में धोखा खाने का ये फ़ायदा हुआ है,अब ज़माने के रस्मो-रिवाज़ों से ये दिल बरी है।/…"

विवेक मिश्र replied May 5, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ७ (Now Closed)

355 May 8, 2011
Reply by Admin

"धन्यवाद एडमिन महोदय."

विवेक मिश्र replied Mar 29, 2011 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

प्रधान संपादक

"हार्दिक आभार, राजबुन्देली जी! आपकी लेखनी ने भी जमकर रंग बरसाए. बधाई स्वीकारें."

विवेक मिश्र replied Mar 9, 2011 to "OBO लाईव महा-उत्सव" अंक-५ (एक रपट)

13 Mar 10, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
2 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
2 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
6 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
21 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
22 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service