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Tilak Raj Kapoor's Discussions (2,110)

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"तरही की घोषणा होने के बाद यह बात ध्यान में लायी गयी कि इसी ग़ज़ल से पूर्व में तरही म…"

Tilak Raj Kapoor replied Oct 26, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-184

76 Oct 26, 2025
Reply by Tilak Raj Kapoor

"खुशबू सी उसकी लाई हवा याद आ गया, बन के वो शख़्स बाद-ए-सबा याद आ गया। अच्छा शेर हुआ।…"

Tilak Raj Kapoor replied Oct 26, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-184

76 Oct 26, 2025
Reply by Tilak Raj Kapoor

"हमको नगर में गाँव खुला याद आ गया मानो स्वयं का भूला पता याद आ गया।१। अच्छा शेर हुआ।…"

Tilak Raj Kapoor replied Oct 26, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-184

76 Oct 26, 2025
Reply by Tilak Raj Kapoor

"किस को बताऊँ दोस्त  मैं क्या याद आ गया ये   ज़िन्दगी  फ़ज़ूल   अमा   याद   आ गया। यह…"

Tilak Raj Kapoor replied Oct 26, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-184

76 Oct 26, 2025
Reply by Tilak Raj Kapoor

"सुनते हैं उसको मेरा पता याद आ गया क्या फिर से कोई काम नया याद आ गया। अच्छा मतला हुआ।…"

Tilak Raj Kapoor replied Oct 26, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-184

76 Oct 26, 2025
Reply by Tilak Raj Kapoor

"मनुष्य से आवेग जनित व्यवहार तो युद्ध में भी वर्जित है और यहां यदा-कदा यही आवेग ही नि…"

Tilak Raj Kapoor replied Sep 28, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-183

93 Sep 29, 2025
Reply by मिथिलेश वामनकर

"बे-म'आनी को कुशलता से म'आनी लिखना तुमको आता है कहानी से कहानी लिखना यह शेर किसी के ह…"

Tilak Raj Kapoor replied Sep 28, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-183

93 Sep 29, 2025
Reply by मिथिलेश वामनकर

"एक छोटा सा अंतर है किसी को अपना उस्ताद या गुरु मानते हुए संबाेधित करने और मंच पर किस…"

Tilak Raj Kapoor replied Sep 28, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-183

93 Sep 29, 2025
Reply by मिथिलेश वामनकर

"इतनी मुश्किल भी नहीं सच्ची कहानी लिखना एक राजा की मुहब्बत में है रानी लिखना उसकी तार…"

Tilak Raj Kapoor replied Sep 28, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-183

93 Sep 29, 2025
Reply by मिथिलेश वामनकर

"यह ग़ज़ल विवशता के भाव से आरंभ होकर आशा, व्यंग्य, क्षोभ और अंत में गहन निराशा तक की…"

Tilak Raj Kapoor replied Sep 28, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-183

93 Sep 29, 2025
Reply by मिथिलेश वामनकर

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"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
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एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
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"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25
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May 24
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
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May 24

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