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kanta roy's Discussions (2,219)

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"भले ही नाव  कागज की  चलो  दरिया  में तैराएँ उठाए  हाथ में  यारो लहर  कुछ  धूप  तो हो…"

kanta roy replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"वाह ! बहुत  खूब  संदर्भित  हुई है आपके द्वारा ये उजाले ! बचपन में खिडकियों से प्रवाह…"

kanta roy replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"हर दिन आँच तेज करते हो, ख्याल करो इस धरती का। देव तुम्हें हमने माना है, मान रखो इस व…"

kanta roy replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"वाह ! क्या रूप और क्या धूप की चमक है आपकी इन कुण्डलिया में ।बहुत ही उम्दा बनी है लेक…"

kanta roy replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"धूप में रिश्तों की गर्माहट खूब खिली है आपकी इस गजल में आदरणीय मनन कुमार जी । एक अलग…"

kanta roy replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"धूप आज अनमनी है पास प्रश्न हैं कई द्वार ये जो खोल दे है कहाँ किरण नई I तर्क भारी गढ़…"

kanta roy replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"दश्त-ए-बे आब में हम अकेले नहीं जल गये हैं बहुत से चमन धूप में------ वाह ! लाजवाब गजल…"

kanta roy replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"वाह ! क्या खूब कही है यह आपने ! एक अलग ही दृष्टिकोण से और बड़ी ही स्वभाविक भाव में ब…"

kanta roy replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"मैले हाथ से ही सही , बदबूदार निशान ही सही ,खिड़कियों का खुलना बेहद जरूरी था । जरूरी…"

kanta roy replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"धुप-छाँव से हम-तुम धुप -छाँव से हम-तुम , तुम-हम लुका-छिपी खेला करें सूरज नें किरण…"

kanta roy replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

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