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अतुकान्त कविता : पगली (गणेश जी बागी)

अतुकान्त कविता : पगली

विवाहिता या परित्यक्तता
अबला या सबला
नही पता .......
पता है तो बस इतना कि
वो एक नारी है ।


साथ में लिए थे फेरे
फेरों के साथ
वचन निभाने के वादे

किन्तु .......
उन्हे निभाना है राष्ट्र धर्म
और इसे ……
नारी धर्म
पगली !!


उनकी सफलता के लिए
व्रत, उपवास, मनौती
मंदिरों के चौखटों पर
पटकती माथा
और खुश हो गयी
महज सुनकर कि
एक सरकारी कागज में
पत्नी की जगह
उन्होने उसका नाम लिख दिया
मज़बूरी मे ही सही
पहले तो छोड़ देते थे खाली
पगली !!


काल चक्र घुमा
मन्नतें पूर्ण हुईं
बड़ी उम्मीद से सूर्य की ओर तकती
कोई किरण लेकर आएगी बुलावा
इंद्रासन पर बैठते हुए देखना चाहती थी
पगली !!


कोई शिकायत नही
संस्कारी नारी
स्कूल मे पढ़ाती रही
ढाई आखर प्रेम के
किंतु
खुद न पढ़ सकी
सुबह से रात
रात से सुबह
फिर आस जग उठी
आएगा इंद्रलोक से बुलावा
रहने जाएगी महल में
पगली !!


हाय री नारी
यह दिन भी देखना पड़ा
पूछना पड़ा
क्या है अधिकार
उसे आज भी लगता है
वह है अर्धांगिनी
पगली !!

(मौलिक व अप्रकाशित)
पिछला पोस्ट => लघुकथा : दौर

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Comment by JAWAHAR LAL SINGH on November 26, 2014 at 10:22pm
हाय री नारी
यह दिन भी देखना पड़ा
पूछना पड़ा
क्या है अधिकार
उसे आज भी लगता है
वह है अर्धांगिनी
पगली !!
ऐसे नहीं उपनाम है 'बागी' मेरा
समझी नहीं पगली
राजा राम को
या फिर सत्य हरिश्चंद्र का यह देश है
हारी जाती द्रौपदी
खींचे दुशासन केश से
बहुत बहुत अभिनन्दन आपको श्री बागी साहब...
Comment by somesh kumar on November 26, 2014 at 8:02pm

नारी व्यथा का सुंदर और सामयिक वर्णन ,जैसा की विनोद भाई ने संकेत दिया ,पर शायद ऐसी बहुत सी पगली हैं जिन्हें ये नाम भी नहीं मिल पा रहा है |सार्थक  रचना पर बधाई |

Comment by MUKESH SRIVASTAVA on November 26, 2014 at 6:17pm

achhee rachnaa

Comment by savitamishra on November 26, 2014 at 6:16pm

बहुत सुन्दर कविता

Comment by maharshi tripathi on November 26, 2014 at 5:18pm

इस खूबसूरत कविता पर हार्दिक बधाई ,,,आ. बागी जी|

Comment by विनोद खनगवाल on November 26, 2014 at 4:44pm
आदरणीय गणेश जी, यह वेदना जशोदाबेन (मोदी जी पत्नी) की लगती है। बहुत बेहतरीन ढंग से प्रस्तुतिकरण किया गया है। बधाई।

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 26, 2014 at 4:25pm

आदरणीया वेदिका जी, आपकी सराहना और इस कविता पर उपस्थिति दोनों अह्लादित करती है, बहुत बहुत आभार।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 26, 2014 at 4:23pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी, आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया रचना को अलंकृत कर गयी, दिल से आभार प्रेषित करता हूँ स्वीकार करें आदरणीय।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 26, 2014 at 4:21pm

आभार आदरणीय नीलेश जी।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 26, 2014 at 4:21pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी, रचना पर आपकी उपस्थिति कविता को सार्थक कर गयी, उत्सावर्धन करती प्रतिक्रिया पर हृदय से आभार।

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