For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मंत्रालय में आग.......भाग डी. के..भाग.......!!!!!!

--------------------------------------
आग!
बड़ा ही बहु-आयामी शब्द है ये.
दिल से लेकर मंत्रालय तक इसकी हुकूमत के झंडे लहराते है.
आग मत लगा..
आग लगा दूंगा
पानी में आग लगाना
तन-बदन पे आग लगना
जाने कितने तरीके है आग को जताने के.
रोमांटिक हुये तो गा दिया..दो बदन जल गए प्यार की आग में....
अरे छोडिये हमें प्यार-व्यार के आग पे अपनी कलम नहीं घिसनी.हमें तो मतलब है ..मंत्रालय की आग से!
वैसे भी मंत्रालय कहते ही तन-बदन पे आग लग जाती है.लगे भी क्यों ना.बड़े-बड़े खोखले वादे करने वाले बड़े आराम से इस स्वर्ग में पांच साल के लिये आराम फरमाते है. 
क्या आम जनता के हाय की यही आग है जिसकी ज्वाला में मंत्रालय स्वः हो गया या फिर ये आर एक आदर्श आग थी जिसके साये में नेता-अफसर-बिचौलियों ने अपनी चाँदी काट ली.एक विद्वान साहित्यकार ने तो मंत्रालय को उल्लू से जोड़कर 'मंत्रालय में उल्लू 'तक की रचना कर डाली...तो क्या आग और उल्लू एक ही सिक्के के दो पहलू है!!!
नहीं-नहीं आग उल्लू नहीं हो सकती क्यूँ की आग बड़ी समझ बूझ के लगती है.जब मंत्रालय में रखे पाप के बड़े-बड़े घड़े भरकर ओवर-फ्लो होने लगते है तब ये आग बड़ी समझदार है...अपने आकाओं का इशारा पाते ही भक्क से लग जाती है.
वैसे भी भ्रष्टाचार को हमारे पूर्वजों ने आग ही कहा है और इससे दूर रहने  की नसीहते पानी पी-पी कर दी है.
आज मुंबई में तो दूसरे दिन  दिल्ली मेंमगर तीसरे दिन कोलकाता में लगाने की जरुरत ही नहीं क्यूंकि ममता दीदी के तन-बदन पे वैसे ही पहले राष्ट्रपति-चुनाव के नाम से तो अब टाटा के शिन्ग्नूर मामला जीतने  के नाम पर आग की लपटे सारा हिंदुस्तान देख रहा है.
आग के महत्ता पे जितना भी प्रकाश डाला जाये कम ही है.घर की सिगड़ी से लेकर गरीबों की झुग्गी-झोपड़ियो से लेकर मंत्रालय तक आग ही आग के कसीदे पढ़े जा सकते है.
शहर के किसी मौका-ऐ-खास पे किसी बिल्डर की नज़र गडी तो समझो गरीबो का वो ठिकाना बिल्डर के पैसा कमाने की हवस के आग में जले बिना नहीं रह सकता 
मंत्रालय में सबसे ज्यादा आग से खेला जानेवाला विभाग यानी नगर विकास विभाग!!
इसीलिए आग यहीं लगी   और बाद में पुरे मंत्रालय को अपने चपेट में ले लिया.
एक से एक ज्वलनशील पदार्थ इस विभाग में आपको मिल जायेंगे
एक आग और अन्ना-स्टाइल भ्रष्टाचार की सारी योजना पानी-पानी .
चिल्लाते रहो जंतर-मंतर पे गला फाड़ते रहो.आग लगनी है भ्रष्टाचार की तो वो कण-कण  में लग चुकी है.
मंत्रालय की आग तो दूर से दिखती है मगर लोगो क़े मन में लगी जिज्ञासा की आग का  क्या.......!!!!!
अब विपक्षियो को मिल गया है मौका आग में घी डालने का
क्या मंत्रालय में यही दल आग लगा सकता हा!!!
एक मौका हमें भी मिलना चाहिए..विपक्षियों का आर्तनाद है ये.
मामले को रफा-दफा करने का आग से अच्छा सोलुशन कोई और हो ही नही सकता
कागजात भी जल कर खाक और संगणकों की हार्ड डिस्क भी
अब सबूत क्या हलवाई की दुकान से लाओगे.
है न जोरदार आइटम
न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी...
'नष्ट हुये आदर्श सब,मिट गए सभी सबूत.
आग लगी मंत्रालय में,पेपर जले अकूत."
---अविनाश बागडे.

Views: 646

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on June 24, 2012 at 12:46pm
अविनाश सर, बड़ी खूबसूरती से आपने "आग" लगा दी। बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Chetan Prakash commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post भादों की बारिश
"यह लघु कविता नहींहै। हाँ, क्षणिका हो सकती थी, जो नहीं हो पाई !"
Tuesday
सुरेश कुमार 'कल्याण' posted a blog post

भादों की बारिश

भादों की बारिश(लघु कविता)***************लाँघ कर पर्वतमालाएं पार करसागर की सर्पीली लहरेंमैदानों में…See More
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . . विविध

मंजिल हर सोपान की, केवल है  अवसान ।मुश्किल है पहचानना, जीवन के सोपान ।। छोटी-छोटी बात पर, होने लगे…See More
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय चेतन प्रकाश भाई ग़ज़ल पर उपस्थित हो उत्साह वर्धन करने के लिए आपका हार्दिक …"
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय सुशील भाई  गज़ल की सराहना कर उत्साह वर्धन करने के लिए आपका आभार "
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय लक्ष्मण भाई , उत्साह वर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार "
Monday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"विगत दो माह से डबलिन में हूं जहां समय साढ़े चार घंटा पीछे है। अन्यत्र व्यस्तताओं के कारण अभी अभी…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"प्रयास  अच्छा रहा, और बेहतर हो सकता था, ऐसा आदरणीय श्री तिलक  राज कपूर साहब  बता ही…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"अच्छा  प्रयास रहा आप का किन्तु कपूर साहब के विस्तृत इस्लाह के बाद  कुछ  कहने योग्य…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"सराहनीय प्रयास रहा आपका, मुझे ग़ज़ल अच्छी लगी, स्वाभाविक है, कपूर साहब की इस्लाह के बाद  और…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"आपका धन्यवाद,  आदरणीय भाई लक्ष्मण धानी मुसाफिर साहब  !"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"साधुवाद,  आपको सु श्री रिचा यादव जी !"
Sunday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service