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Rinki Raut
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Samar kabeer commented on Rinki Raut's blog post पिया....
"मोहतरमा रिंकी राउत जी आदाब,कविता बहुत अच्छी है,बधाई स्वीकार करें । कुछ टंकण त्रुटियाँ सुधार लीजिये :- 'धीमे धीमे दहक रहे है-"हैं" 'गर्म है'-"गर्म हैं" "बुझे आँच की तरह'-"बुझी आँच की…"
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"आदरणीय रिंकी जी सुंदर अहसासों की सुंदर प्रस्तुति    .. हार्दिक बधाई। "
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Mohammed Arif commented on Rinki Raut's blog post पिया....
"प्रिय रिंकी जी आदाब, सुंदर अहसासों की ख़ुशबू से सराबौर बेहतरीन कविता । हार्दिक बधाई और मंच पर स्वागत ।"
Nov 15, 2017
Rinki Raut posted a blog post

पिया....

बंद दरवाज़ा देखकरलौटी है दुआआँख खुली तो जाना ख़्वाब और सच है क्या धीमे-धीमे दहक रहे हैआँखों में गुजरे प्यार वाले पलराख हो कर भी सपनेगर्म हैबुझे आँच की तरह बर्फ में जमे अहसासमानो धुव में ठहरेदिन –रात की तरह चुपी ओढे बैठी मैंचेहरे पर सजाए मुस्कुराहटप्यार का मोती खोयामन की गहराइयों में जाने कहा बंद दरवाज़ा देखकरलौटी है दुआ (मौलिक और अप्रकाशित)रिंकी राउत See More
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Gender
Female
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Kolkatta
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India
Profession
Education
About me
Writing is my passaion

Rinki Raut's Blog

पिया....

बंद दरवाज़ा देखकर

लौटी है दुआ

आँख खुली तो जाना ख़्वाब और सच है क्या

 

धीमे-धीमे दहक रहे है

आँखों में गुजरे प्यार वाले पल

राख हो कर भी सपने

गर्म है

बुझे आँच की तरह

 

बर्फ में जमे अहसास

मानो धुव में ठहरे

दिन –रात की तरह

 

चुपी ओढे बैठी मैं

चेहरे पर सजाए मुस्कुराहट

प्यार का…

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Posted on November 13, 2017 at 10:42pm — 4 Comments

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