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प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'
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प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s Page

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post जिंदगी तुझ पर ये दिल भी, कर गया कुर्बान क्यों?
"हार्दिक बधाई ।"
Dec 5
Manoj kumar shrivastava commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post जिंदगी तुझ पर ये दिल भी, कर गया कुर्बान क्यों?
"आदरणीय पाण्डेय जी, इस रचना पर मेरी बधाई स्वीकार करें।"
Dec 4
Mohammed Arif commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post जिंदगी तुझ पर ये दिल भी, कर गया कुर्बान क्यों?
"आदरणीय प्रदीप कुमार जी आदाब, बहुत ही बेहतरन ग़ज़ल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की बेशक़ीमती इस्लाह का संज्ञान लें ।"
Dec 2
Samar kabeer commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post जिंदगी तुझ पर ये दिल भी, कर गया कुर्बान क्यों?
"जनाब प्रदीप कुमार पाण्डेय'दीप'जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । इस मंच पर ग़ज़ल के साथ अरकान लिखने का नियम है,जो आपने नहीं लिखे? 'पूछता है हाल अब तो मुझसे'मेरा रहगुज़र' इस मिसरे में 'रहगुज़र'शब्द…"
Dec 2
प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' posted a blog post

जिंदगी तुझ पर ये दिल भी, कर गया कुर्बान क्यों?

बेखब़र क्यों हो गया तू? हो गया अनजान क्यों?ज़िंदगी तुझ पर ये दिल भी, कर गया कुरबान क्यों?बेबसी कुछ भी नहीं थी, जिंदगी के दरमियाँ,चार दिन का बन गया फिर, तू मिरा महमान क्यों?पूछता है हाल अब तो, मुझसे' मेरा रहगुज़र,हो गई है, आजकल ये, ज़िन्दगी वीरान क्यों?बोझ सी लगने लगी है, जिंदगी कुछ रोज़ से,कोई' ऐसा मुझ पे' जाने, कर गया अहसान क्यों?बन गई गुरबत भी दुश्मन, ज़िन्दगी की राह में,ख्वाहिशें क्यों मिट गईं हैं? लुट गये अरमान क्यों?'दीप' तन्हाई मयस्सर, हो रही बदल-ए-वफ़ा,जिंदगी हर मोड़ पर अब, लग रही सुनसान…See More
Dec 2
प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"बिल्कुल, समय मिलते ही इन्हें दुरुस्त करूँगा।"
Dec 1
Samar kabeer commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"तो,इन मिसरों को पटल पर दुरुस्त कर लीजिये न?"
Dec 1
प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"जनाब समर कबीर साहिब! सलाह देने के लिए शुक्रिया. बिलकुल सही कहा अपने रब्त नहीं है. क्योकि मुझे भी यह मिसरे पढने में समस्या हो रही है."
Dec 1
प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"आद०  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'  तहे दिल से शुक्रिया "
Dec 1
प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"आद० बासुदेव अग्रवाल 'नमन' दादा जी, बहुत बहुत धन्यवाद."
Dec 1
प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"मुहतरम शेख शहजाद उस्मानी साहिब. ग़ज़ल में शिरकत और हौसला आफजाई के लिए शुक्रिया"
Dec 1
प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' updated their profile photo
Dec 1
vijay nikore commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"बहुत खूबसूरत एहसास । हार्दिक बधाई।"
Nov 23
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"वाह बहुतखूब ग़ज़ल हुई.. बधाई"
Nov 21
Tasdiq Ahmed Khan commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"जनाब प्रदीप साहिब ,ग़ज़ल की अच्छी कोशिश की है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं । मुहतरम समर साहिब की बातों पर गौर करें"
Nov 20
Mohammed Arif commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"ज़माना फिर न जाने क्यों ख़फ़ा होने लगा है। मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है।। वाह! वाह!! बहुत माक़ूल बात कही आपने । ज़माना तो सदियों से प्यार का शत्रु रहा है । बहुत ही उम्दा ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय प्रदीप कुमार पाण्डे जी ।"
Nov 20

Profile Information

Gender
Male
City State
भुज, गुजरात
Native Place
सिमरिया,

प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s Blog

जिंदगी तुझ पर ये दिल भी, कर गया कुर्बान क्यों?

बेखब़र क्यों हो गया तू? हो गया अनजान क्यों?

ज़िंदगी तुझ पर ये दिल भी, कर गया कुरबान क्यों?

बेबसी कुछ भी नहीं थी, जिंदगी के दरमियाँ,

चार दिन का बन गया फिर, तू मिरा महमान क्यों?

पूछता है हाल अब तो, मुझसे' मेरा…

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Posted on December 1, 2017 at 8:37pm — 4 Comments

मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है

*1222 1222 1222 122*



ज़माना फिर न जाने क्यों ख़फ़ा होने लगा है।

मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है।।



कभी वादे किये जिसने कसम खाकर ख़ुदा की,

वही फिर अब न जाने क्यों ज़ुदा होने लगा है।।



वहाँ पर हाल कैसा है, वही बस जान पाया,

यहाँ पर ज़ख़्म, ज़ख़्मों की दवा होने लगा है।।



समझ बैठा था' तुमको मैं, मुहब्बत का समंदर,

गुमाँ मेरा यहाँ आकर, रफ़ा होने लगा है।।



मुहब्बत का हमेशा ही यही अंज़ाम होता,

शमा से…

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Posted on November 17, 2017 at 5:30pm — 14 Comments

दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए

*212 212 212 212*



हो गया ख़ास वह, ज़िंदगी के लिए।

दिल धड़कता था' जिस, अज़नबी के लिए।।



दूर तुम से रहा, आज तक मैं सनम,

हूँ ख़तावार उस, बेबसी के लिए।।



जान देकर तुझे, जान जाता अगर,

जान जीता नहीं, मयकशी के लिए।।



देख चहरा तिरा, चाँद शरमा गया,

बन गई शम'अ तू, तीरगी के लिए।।



मुझको' रब की कई, नेमतें मिल गईं,

सर झुकाया सदा, बंदगी के लिए।।



बिन तिरे एक पल, मुझको' जीना नहीं,

दिलनशीं चाहिए, दिल्लगी के… Continue

Posted on November 15, 2017 at 3:34pm — 17 Comments

न बदले गर ये हालात

*1222 1221



न बदले गर ये' हालात।

फिर आ जायेगी बरसात।।



भले ही कुछ दिनों बाद

मगर होगी करामात।।



तुम आशिक हो ही' बदनाम

दिखा दी अपनी' औकात।।



मुझे कोई न इतराज़

कभी कर लो मुलाकात।।



करूँ कैसे अब इतिबार,

तुम आये हो अकस्मात।।



किसी से कुछ न अब उम्मीद,

सुनो मेरे खयालात​।।



फ़ना तुझपे दिलो जान

करूँ तो फिर बने बात।।



ज़वानी जोश में आज

न कर बैठे कुछ उत्पात।।



नहीं है 'दीप'… Continue

Posted on November 11, 2017 at 10:50pm — 4 Comments

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