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Dr. Vijai Shanker's Discussions (1,850)

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"मैने भी सौगन्ध उठाई उसकी रक्षा करने की बहना ने जब हाथ पे मेरे बांधा धागा राखी का सुन…"

Dr. Vijai Shanker replied Feb 13, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"देते जो हक़ से अधिक,कर्त्तव्यों पर जोर, वे ही कसकर थामते, संबंधों की डोर | यथार्थ , आ…"

Dr. Vijai Shanker replied Feb 13, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"बरबस धागा प्रेम का, कब बाँधे है बोल जब बाँधे तो दे खुशी, तनमन करे किलोल॥ वाह, बधाई आ…"

Dr. Vijai Shanker replied Feb 13, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी, आपकी प्रशस्ति से बहुत उत्साह बढ़ता है, आपको रचना अ…"

Dr. Vijai Shanker replied Feb 13, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
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"आदरणीय खुर्शीद खैरादी जी, रचना को मान देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार , आपकी बधाई के…"

Dr. Vijai Shanker replied Feb 13, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
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"आदरणीय राजेश कुमारी जी , आपने रचना को महत्त्व एवं मान दिया। आपकी शुभ अभ्व्यक्ति के ल…"

Dr. Vijai Shanker replied Feb 13, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
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"आदरणीय डॉ O उषा चौधरी साहनी जी , आपने रचना को सही आंका है, जीवन की डोर कई तरह बांधती…"

Dr. Vijai Shanker replied Feb 13, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"धागा मुहब्बत का मेरी इतना नहीं है कच्चा तेरे दुखों का भार मन की डोर से उठा लूँ आदरणी…"

Dr. Vijai Shanker replied Feb 13, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
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"बुरा हूं या भला हूं मैं शरण में अब तुम्हारी हूं मुझे रघुनाथ जी अपनी कृपा की डोर से ब…"

Dr. Vijai Shanker replied Feb 13, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"जीवन की डोर ---- डॉo विजय शंकर डोर है ,डोर है , डोर डोर का जोर है , डोर डोर में जोर…"

Dr. Vijai Shanker replied Feb 13, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
10 hours ago

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
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Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
15 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
16 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
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अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
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Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
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Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
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vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
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Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
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