For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

भूले से भी नहीं !!!


तुम मुझसे ज़िन्दगी के गीत सुनना चाहते हो
चाहते हो मैं सबकुछ भूलकर सहज हो जाऊँ
हंसाऊं ... एक गुनगुनाती शाम ले आऊं ...
तुम्हें पता है
ज़िन्दगी मेरे पास है
गुनगुनाती लहरें हैं
हँसी की जादुई छड़ी है
सफ़ेद उड़नेवाले बादल हैं
इन्द्रधनुषी खिली धूप है
तुम्हें पता है-
मैं गीतों की पिटारी हूँ ....
पर तुम हमेशा मुझसे क्यूँ गीत सुनना चाहते हो
गीत तो ईश्वर ने तुम्हें भी दिए थे
वही लहरें
वही छड़ी
वही बादल
वही खिली धूप
........
अनजानी मुद्रा मत अपनाओ
गीतों से पहले एक सच मुझसे जानो -
तुमने अपनी चीजों पर ताला लगा दिया
उसे अकेले में खोलने और जीने के लिए
....
तुम अपनी चालाकी में जान ही नहीं सके
कि सारे गीत पुराने हो गए
लहरों ने अपना अस्तित्व खो दिया
छड़ी में जंग लग गई
बादल स्याह हो गए
धूप में कोई चमक नहीं रही
....
अपने स्व की मद में तुमने सिर्फ चाल चले
इस बात पर गौर ही नहीं किया
कि ईश्वर ने तो टूटी झोपड़ी में भी
सरगम का जादू दिया है
पसीने की बूंदें पोछ
ढोलक की थाप पर
जो ख़ुशी झोपड़ी में थिरकती है
वह बड़ी सात्विक होती है
लहरें वहाँ खुद आती हैं
बादल नृत्य करते हैं
धूप सीधे कमरे में आती है
हर चेहरे में जादुई छड़ी होती है......
खैर ...
सबकुछ उलटकर
हर बार
तुम चाहते हो -
भूलकर सारी उल्टी चाल
मैं गाऊँ
लहरों से कहूँ तुम्हें भी छू लें
बादल तुम्हारे संग भी खेलें
..... सच तो है कि तुम ये चाहते हो
कि मैं अपनी जादुई छड़ी तुम्हें दे दूँ
....
बहुत छला तुमने
या फिर यूँ कहो
स्वभाववश मैं छली गई
पर अब -
ये मुमकिन नहीं
भूले से भी नहीं !!!

Views: 892

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by anand pandey tanha on April 4, 2011 at 10:16am
बहुत दिनों बाद एक नैसर्गिक गीत पढ़ा , अत्यंत ही सुंदर गीत के लिए बधाई . तनहा आनंद 
Comment by DR. DINESH BALLABH on March 23, 2011 at 6:48pm
bahut khoob....
Comment by prabhat kumar roy on March 22, 2011 at 6:02am
कि ईश्वर ने तो टूटी झोपड़ी में भी
सरगम का जादू दिया है
पसीने की बूंदें पोछ
ढोलक की थाप पर
जो ख़ुशी झोपड़ी में थिरकती है
वह बड़ी सात्विक होती है
लहरें वहाँ खुद आती हैं
बादल नृत्य करते हैं
धूप सीधे कमरे में आती है
हर चेहरे में जादुई छड़ी होती है......
Beautiful line were written by RASHMI PRABHA. Vary good poem.
Comment by Ajay Singh on March 17, 2011 at 1:14pm
VERYYYYY GoooooooD,,,,,
Comment by rashmi prabha on March 8, 2011 at 11:47am
ji shukriyaa
Comment by neeraj tripathi on March 8, 2011 at 11:43am
Padh kar acchha laga...women's day ke liye upyukt kavita...ek sankalp hai naariyon ke liye..swayam ko pehchanne ka...apne astitva ko garv se jeevit rakhne ka....i liked it.
Comment by seema singhal on March 7, 2011 at 4:03pm
सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई .........।
Comment by rashmi prabha on March 6, 2011 at 10:50pm
shukriyaa
Comment by Devi Nangrani on March 6, 2011 at 9:19pm

Bahut hi sakaratmak soch shabdon mein abhivyakt ki hai Rashimji

 

Comment by rashmi prabha on March 5, 2011 at 10:45pm
shukriyaa

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . शृंगार
"किसने कहा छंद स्वर आधारित 'ही' हैं। तब तो शब्दों के अशुद्ध उच्चारण करने वाले छांदसिक…"
16 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . शृंगार
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । स्पर्शों में…"
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"आदरणीय विजय निकोर जी, एक अरसे बाद आपकी कोई रचना पढ़ रहा हूँ. एकान्त और अकेलापन के बीच के अन्तर को…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . शृंगार
"बात हुई कुछ इस तरह,  उनसे मेरी यार ।सिरहाने खामोशियाँ, टूटी सौ- सौ बार ।। ............ क्या…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"इस स्नेहिल अनुमोदन हेतु हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी. "
yesterday
vijay nikore posted a blog post

सुखद एकान्त है या है अकेलापन

तारों भरी रात, फैल रही चाँदनीइठलाता पवन, मतवाला पवनतरू तरु के पात-पात परउमढ़-उमढ़ रहा उल्लासमेरा मन…See More
Monday
vijay nikore added a discussion to the group English Literature
Thumbnail

LONELINESS

LonelinessWrit large,born out of disconnectbetween me and my Self,are slivers of Timewhere there is…See More
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

अपना बबुआ से // सौरभ

 कतनो सोचऽ फिकिर करब ना जिनिगी के हुलचुल ना छोड़ी कवनो नाता कवना कामें बबुआ जइबऽ जवना गाँवें जीउ…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। उत्तम नवगीत हुआ है बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"चमत्कार की आत्मकथा (लघुकथा): एक प्रतिष्ठित बड़े विद्यालय से शन्नो ने इस्तीफा दे दिया था। कुछ…"
Jan 1
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"नववर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं समस्त ओबीओ परिवार को। प्रयासरत हैं लेखन और सहभागिता हेतु।"
Jan 1, 2026

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ

सूर्य के दस्तक लगाना देखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठित जिस समय जग अर्थ ’नव’…See More
Jan 1, 2026

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service