अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का भारअजीब-सी बेचैन बेकाबू धड़कन कातकलीफ़-भरा भयानक शोर ...पन्नों पर उतर तो आते हैं यहपर भरमाया घबराया मनइनकार भराभार कोई हल्का नहीं होता.पगलाई अन्दरूनी हवाएँखयालों-सी वेगवानझकझोरती आसमानी तूफ़ान बनीलफ़्ज़ों से…
24.10.26मुज़ारे मुसम्मन अख़रबमफ़ऊल फ़ाएलातुन मफ़ऊल फ़ाएलातुन221-2122- //-221-2122 क्यों दूर हो गए तुम , हमको सजा दिला केलानत मिली है हमको , रिश्ता सही निभा के रखता हूँ पास अपने , मैं तारे आसमाँ केजब हो जरूरतें तो , झोली भरूँ गिना के था साथ जो हमारा , शायद वो चल ना पाताशिकवा करें कहाँ पे ,आँसू…
हज़ज मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ महज़ूफ़मफ़ऊल मुफ़ाईलु मुफ़ाईलु फ़ऊलुन 221 1221 1221 122चाहत के इशारे कभी हमको नहीं आतेये चाँद -सितारे कभी हमको नहीं आते बोलो तो कभी ला दूँ मैं रातों में तबाहीये दिन के उजाले कभी हमको नहीं आते आवाज कहाँ देते सितमगर यहाँ सब हैंदो कौर निवाले कभी हमको नहीं आते सूखे से…
24.10.26कामिल मुसम्मन सालिममुतुफ़ाइलुन मुतुफ़ाइलुन मुतुफ़ाइलुन मुतुफ़ाइलुन11212 11212 11212 11212 मैं किसे तो याद करूँ कहो किसे भूलना पड़े है मुझेये मिरे नसीब की खामियाँ तुझे बोलना पड़े है मुझे है निगाह में मिरे शहर की बनी सब बड़ी ये इमारतेंतिरी ही गली का पता बिना रुके पूछना पड़े है…
मुतदारिक मुसम्मन सालिमफ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन212 212 212 212 लोग ही जब नजर को चुराते रहेपास मेरे खुदा ख़ूब आते रहे ऐब तेरे कहीं जब छुपाते रहेवो गिनाते रहे हम लजाते रहे याद में थी गलतियाँ अनेकों जिसेहम खता मान अपनी भुलाते रहे ये मदारी बना आदमी आजकलजाने क्या -क्या कहीं भी नचाते…
रमल मुसम्मन महज़ूफ़फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन2122 2122 2122 212दोस्ती का हाथ हमसे भी मिलाते जाइएएक गुल जिंदा दिली की बस खिलाते जाइए मशवरा मै भूलता हूँ कब किसी का आजकलबेसबब तोहमत कहीं फिर ना लगाते जाइए इस सियासत की जड़ें ज्यादा कहीं गहरी जमीअब जरा ताकत लगा इसको हिलाते जाइए गर बगावत…
रमल मुसम्मन महज़ूफ़फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन 2122 2122 2122 212 लापता मैं हो गया इक गुमशुदा के वास्तेमांग लूँ मैं माफियाँ हरदम ख़ता के वास्ते जिंदगी की राह में खोने लगा है आदमी खलबली सी है मची शर्मों -हया के वास्ते जानता हूँ यहाँ मजबुरियाँ हैं आजकललोग लड़ने आ गए आबो हवा…
हज़ज मुसद्दस महज़ूफ़मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन 1222 1222 122जो नाजुक दौर में हिलता रहा हैवो कुर्सी का मिरा पाया रहा है ये हाले जार पर मेरे किसी केखयालों का कसीदा आ रहा है हमारी जिंदगी का फैसला भीअदालत में सुनाया जा रहा है नकाबों में छिपा है आदमी भीसजायें और कोई पा रहा है अभी तो तंज कसता हूँ…
रमल मुसम्मन महज़ूफ़फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन2122 2122 2122 212 बद-नसीबी क्या कहें हम आज जो हालत हुईरोक कर पूछा किसी ने क्या कहीं दहशत हुई ये जमाना है नहीं अपने लिए अब आजकलछोड़ दें इसको अभी बस हार की हसरत हुई हम अकेले ही सफर में निकले कि मंजिल मिलेहर दफा क्यूँ आज हमको रोने की आदत…
Muzare.a musamman aKHrab makfuuf mahzuufmaf'uul faa'ilaat mufaa'iil faa'ilun221 2121 1221 212कातिल मुझे तू शहर का कहते रहा तो हैचेहरा मिरा करीब से देखा हुआ तो है मेरी जुबां पे ताले पड़े थे कई दिनोंयकता मिरा गरीब कहीं बोलता तो है अब कोतवाल शहर का निकला है गश्त मेंमालूम उसको आज का सब …