• कुंडलिया. . . . झोला

    कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल ।।उनकी बढ़ती  चाल , पसीना टप -टप टपके ।कैसे  लें  सामान , जेब  को   लगते   झटके ।।भर  कर  ठंडी  साँस , मुरारी फिर यह बोला ।क्या  लेना  सामान , भला  है  खाली  झोला ।।सुशील सरना / 19-9-26मौलिक एवं…

    By Sushil Sarna

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  • भाषा से भी बढ़ इक भाषा

    है भाषा का उपकार बड़ा बना दिया हमको इनसान। भाषा से भी बढ़ इक भाषा जिसकी होती नहीं जबान। प्यारा-सा नवजात कभी जब इस दुनिया में आता है। ना शब्दों का बोध अभी बस रोता है चिल्लाता है। उसके रोते ही माँ तत्क्षण अपना क्षीर पिलाती है। कैसे जननी की थपकी से धुन लोरी की आती है। कैसे लाती है इक ममता शिशु के…

    By Dharmendra Kumar Yadav

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  • गोस्वामी तुलसीदास जी के प्रति श्रद्धांजलि

    सहित लखन अरु जानकी, विपिन गए रघुनाथ। राम धाम तुलसी गए, अवधी अवध अनाथ।भावार्थ:- प्रभु श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण जी के वनगमन के पश्चात जो दशा अवध (अयोध्या) और अवधी (अयोध्या वासियों) की हुई थी वही हालत गोस्वामी तुलसीदास जी के बैकुंठ धाम जाने के बाद अवध और अवधी (अवधी भाषा) की हो गई है।"मौलिक व…

    By Dharmendra Kumar Yadav

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  • सांकल मन के द्वार पर

    सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे मन के द्वार तकमेरे दिल की दस्तक नहीं पहुंची ?"दस्तक पहुँचीपहुँची हर बारभाग कर साँकल खोलीकोई था न द्वार परचिरकाल से जाने-पहचानेअकेलेपन के सिवाहाँ, इस दर्दीलेअकेलेपन के सिवाकुछ और न थालौट आया मैं खाली…

    By vijay nikore

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  • हरिगीतिका छंद

      हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम लो।करते  रहो  नित  भक्ति  प्रभु  की, नित्य प्रभु आराधना।तब  बिन  कहे   हर  एक  होगी,  पूर्ण   मंगल  कामना।।   *आ  जाइये  प्रभु  की  शरण  में,  मोक्ष  का  सुख  पाइये।नित  गाइये  प्रभु  वन्दना  नित,  नाम  हरि…

    By Ashok Kumar Raktale

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  • दोहा पंचक - - - - शोखी

    दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत ।।अधरों ने की दिल्लगी, अधरों से कल रात ।जिसका डर था हो गई, शर्मीली सी बात ।।बारिश में अच्छा लगे, नजरों को संवाद ।इच्छाओं का मन करे, मिल कर फिर अनुवाद ।।हल्की- हल्की जब पड़ी, यौवन पर बौछार ।प्रणय निवेदन में…

    By Sushil Sarna

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  • चौपाइयाँ

    दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ तुम्हारा। हरपल था सुरभित अति प्यारा।।मन   साजन  यह  कैसे  भूले। साथ-साथ   तुम  हम  थे   झूले।।*तुम   थे  झूले   थाम   कलाई। मैं   साजन   कितनी  शरमाई।।तुम  जब-जब  थे  पींग बढ़ाते। हम   इक  दूजे  में   खो…

    By Ashok Kumar Raktale

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  • बरसात

    बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते खड़के भीगे लरजेचिड़िया सहमी बादल गरजे,कुत्ते दुबके गैया भागीइक नन्हीं सी गुड़िया जागीसुनकर उसकी तेज रुलाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई सड़कों से बह निकला पानीराहगीरों ने छतरी तानी,छप-छप करते कदम बढ़ातेठोकर…

    By Ashok Kumar Raktale

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  • दोहा सप्तक. . . .मंच

    दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग तो वह मंच है, जिसमें रंग अनेक ।कहीं कहकहे गूँजते, कही दर्द  अतिरेक ।।निश्चित सबको छोड़ना, जीवन का यह मंच ।पर्दा गिरते ही मिटें , झूठे सभी प्रपंच ।।आदि - अन्त के मध्य को, मंच करे साकार ।इस जीवन के सत्य…

    By Sushil Sarna

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  • रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

    बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से पागल जनता, चुप रहिएपूँजीपति को सारी सुविधा, चुप रहिए प्रश्न किया तो कह देंगे गद्दार सभीअवतारी है अपना राजा, चुप रहिए राजसभा में न्याय खड़ा है घुटनों परकर दीजै फूलों की वर्षा, चुप रहिएसच को फाँसी पर लटकाया…

    By धर्मेन्द्र कुमार सिंह

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