दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों में ही रह गए , हसीं उम्र के साल ।करें अधूरी हसरतें , मन में बड़ा मलाल ।।मुड़ - मुड़ देखे उम्र जो, पीछे छूटे मोड़ ।क्या है अपने पास अब, क्या आए हम छोड़ ।।रही शिकायत वक्त से, गया उम्र जो छीन ।कहाँ वक्त की…
दरियादिल हो बाप जब, करता कन्यादान।दयावान भगवान हो, रखता उसका मान।रखता उसका मान, भात नरसी-सा भरता।आठ पहर धन-धान्य, वस्त्र की वर्षा करता।कहते कवि 'कल्याण', मिले तब जीवन साहिल।करके कन्यादान, दिखाए जब दरियादिल।।मौलिक एवं अप्रकाशित
प्यादे : एक संख्या भरप्यादे— बेकसूर, बेख़बर, नियति और नीति से अनजान—अक्सर मान लिये जाते हैंमात्र एक संख्या भर।तैनात कर दिये जाते हैं महाराज-महारानी के गिर्द रक्षा-कवच बनकर,और उसी क्षणउनकी पहचान सिमट जाती है—एक संख्या भर।वे मात खाते हैं, कभी मात दिलाते भी हैं, गिरते हैं, उठते हैं,और फिर गिरा दिये…
दोहा सप्तक. . . . . . विविधकभी- कभी तो कीजिए, खुद से खुद की बात ।सुलझेंगे उलझे हुए, अंतस के हालात ।।खामोशी से पूछिए, क्या है उसका दर्द ।किन राहों की है भरी, उसमें इतनी गर्द ।।लफ्ज अकेले हो गए, ठहर गए जज्बात ।कोई अपना दे गया, दिल को वह आघात ।।हुई उम्र तो सामने, उभरी हर तस्वीर ।रुखसारों पर दर्द की,…
दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम ।।उन्मादी आवेग में , कब कुछ रहता ध्यान ।अधरों की शैतानियाँ, कहते सुर्ख निशान ।।अधरों ने की दिल्लगी, अधरों से कल शाम । जज्बातों के वेग में, बंध हुए बदनाम ।।अधर समागम जब हुआ, खूब हुआ संग्राम ।स्पर्शों के दौर…
आत्म मुग्ध मदारी--------------------------------------बजा रहे डुगडुगीनाच रहे बन्दरसैंकड़ों ,हज़ारोंसम्मोहित बंदरअरबों खरबों तमाशबीनदेख रहे तमाशापीट रहे तालियाँसम्मोहित तमाशबीनमदारीउगाह रहा दाननितांत निजी झोली मेंएक एक के पास जानज़रें मिलाध्यान से देखपहचान बनाकभी फुसलाकभी बहलाकभीक्रोधित लाल आँखे दिखाएक…
भ्रम सिर्फ बारी का है************************************बरसों बरस लगेबीज को बहलाने मेंभरपूर दरखत बनाने मेंबरसात नहलाती रहीधूप सहलाती रहीहवा आती रहीहवा जाती रहीबरसों बरस लगे धरा कोजड़ो की जगह बनाने मेंबीज को दरख्जत बनाने मेंऔर तुमसंवेदनहीन शिकारी आएताज की कुल्हाड़ी लायेऔर बरसों के पाले दरख़्त का पलों…
बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें******************************बेगुनाही औरइन्साफ कीबात क्यों सोचती हैं ये औरतेंचुपचाप अहिल्या बन क्यों नहीं जाती ?अस्मिता औरसवाल उठाने कीबात क्यों सोचती हैं ये औरतेंचुपचाप द्रौपदी बन क्यों नहीं जाती ?अंधे ताज औरविवेक तर्क कीबात क्यों सोचती हैं ये औरतेंचुपचाप गांधारी बन…
निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि जिसमुकाम मकान दुकानखानदान के नाम कोकमाने मेंसारी उम्र लगाईपाई पाई बचाईखुली खुशीसंतति को थमाईसंग मेंथमा दिएविरासत से मिलेसारे उपहारसंस्कारतीज त्यौहारज़मीन व्यापाररात दिनसप्ताह सालसपनो के घरौदे सब घरबारवही…
दोहा सप्तक. . . . . युद्धहरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।बेबस जनता भोगती , इसका हर अंजाम ।।दो देशों के मध्य जब, होता है संग्राम ।जाने कितने चेहरे , हो जाते गुमनाम ।।कौन करेगा आकलन , कितना हुआ विनाश ।मौन भयंकर छा गया, काला हुआ प्रकाश ।।जंग चलेगी जब तलक, होगा बस संहार ।खण्डहरों के ढेर पर, सब…