• अनसुने अनकहे के बीच

                            अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का भारअजीब-सी बेचैन बेकाबू धड़कन कातकलीफ़-भरा भयानक शोर ...पन्नों पर उतर तो आते हैं यहपर भरमाया घबराया मनइनकार भराभार कोई हल्का नहीं होता.पगलाई अन्दरूनी हवाएँखयालों-सी वेगवानझकझोरती आसमानी तूफ़ान बनीलफ़्ज़ों से…

    By vijay nikore

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  • क्यों दूर हो गए तुम , हमको सजा दिला के

    24.10.26मुज़ारे मुसम्मन अख़रबमफ़ऊल फ़ाएलातुन मफ़ऊल फ़ाएलातुन221-2122- //-221-2122 क्यों दूर हो गए तुम , हमको सजा दिला केलानत  मिली है हमको   , रिश्ता सही निभा के रखता हूँ पास अपने , मैं तारे आसमाँ  केजब हो जरूरतें  तो  , झोली भरूँ  गिना के था साथ जो हमारा , शायद वो चल ना पाताशिकवा करें कहाँ पे ,आँसू…

    By Sushil

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  • चाहत के इशारे कभी हमको नहीं आते

    हज़ज मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ महज़ूफ़मफ़ऊल मुफ़ाईलु मुफ़ाईलु फ़ऊलुन 221  1221  1221  122चाहत के इशारे कभी हमको नहीं आतेये चाँद -सितारे  कभी हमको नहीं आते बोलो तो कभी ला दूँ मैं रातों में  तबाहीये  दिन के उजाले कभी हमको नहीं आते आवाज कहाँ देते  सितमगर यहाँ सब हैंदो कौर  निवाले कभी हमको नहीं आते सूखे से…

    By Sushil

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  • मैं किसे  तो याद करूँ कहो  किसे    भूलना पड़े है मुझे

    24.10.26कामिल मुसम्मन सालिममुतुफ़ाइलुन मुतुफ़ाइलुन मुतुफ़ाइलुन मुतुफ़ाइलुन11212  11212  11212  11212 मैं किसे  तो याद करूँ कहो  किसे    भूलना पड़े है मुझेये मिरे नसीब की खामियाँ  तुझे बोलना पड़े है मुझे है निगाह में  मिरे   शहर  की बनी सब  बड़ी    ये  इमारतेंतिरी ही गली का पता  बिना रुके  पूछना पड़े है…

    By Sushil

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  • लोग  ही जब  नजर को   चुराते रहे

    मुतदारिक मुसम्मन सालिमफ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन212 212 212 212 लोग  ही जब  नजर को   चुराते रहेपास मेरे खुदा   ख़ूब आते रहे ऐब तेरे  कहीं जब  छुपाते रहेवो गिनाते रहे हम लजाते रहे याद में थी  गलतियाँ अनेकों जिसेहम खता मान  अपनी भुलाते रहे ये मदारी बना आदमी आजकलजाने क्या -क्या कहीं भी नचाते…

    By sushil yadav

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  • दोस्ती का हाथ हमसे भी

    रमल मुसम्मन महज़ूफ़फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन2122 2122 2122 212दोस्ती का हाथ हमसे भी  मिलाते  जाइएएक गुल जिंदा दिली की बस खिलाते  जाइए मशवरा मै भूलता हूँ कब किसी का आजकलबेसबब तोहमत  कहीं फिर   ना लगाते जाइए इस सियासत की जड़ें ज्यादा कहीं गहरी  जमीअब जरा ताकत लगा इसको हिलाते जाइए गर  बगावत…

    By sushil yadav

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  • लापता मैं    हो गया इक गुमशुदा के वास्ते

    रमल मुसम्मन महज़ूफ़फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन            2122 2122 2122  212 लापता मैं    हो गया इक गुमशुदा के वास्तेमांग लूँ  मैं माफियाँ  हरदम ख़ता के वास्ते जिंदगी की राह  में खोने लगा है आदमी खलबली सी है मची शर्मों -हया  के वास्ते  जानता हूँ यहाँ मजबुरियाँ हैं आजकललोग लड़ने आ  गए आबो हवा…

    By sushil yadav

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  • जो  नाजुक दौर में  हिलता  रहा है

    हज़ज मुसद्दस महज़ूफ़मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन 1222 1222  122जो  नाजुक दौर में  हिलता  रहा हैवो  कुर्सी का  मिरा   पाया रहा है ये हाले जार पर मेरे किसी केखयालों का कसीदा आ  रहा है हमारी जिंदगी का फैसला भीअदालत में सुनाया जा रहा है नकाबों में  छिपा है  आदमी भीसजायें और कोई पा रहा है अभी तो तंज कसता  हूँ…

    By sushil yadav

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  • बद-नसीबी क्या कहें हम आज जो हालत हुई

    रमल मुसम्मन महज़ूफ़फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन2122 2122 2122 212 बद-नसीबी क्या कहें हम आज जो हालत हुईरोक कर पूछा किसी ने क्या कहीं दहशत हुई ये जमाना है नहीं अपने लिए अब आजकलछोड़ दें इसको अभी बस हार की हसरत हुई हम अकेले ही सफर में  निकले कि  मंजिल मिलेहर दफा  क्यूँ  आज हमको रोने की आदत…

    By sushil yadav

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  • कातिल  मुझे तू शहर का  कहते  रहा तो है

    Muzare.a musamman aKHrab makfuuf mahzuufmaf'uul faa'ilaat mufaa'iil faa'ilun221 2121 1221 212कातिल  मुझे तू शहर का  कहते  रहा तो हैचेहरा मिरा  करीब से देखा हुआ तो है मेरी जुबां  पे ताले  पड़े थे कई  दिनोंयकता  मिरा गरीब  कहीं बोलता  तो है अब कोतवाल शहर का निकला  है गश्त मेंमालूम उसको आज  का सब  …

    By sushil yadav

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