सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई जगाबैएजखन बाजै मधुर मुरली मुरारीकेँतखन ई संग राधाकेँ नचाबैएसलोना श्याम हे चितचोर मोहन छीकरेजक चैन ई गोपिक चुराबैएमनोहर रूप ‘मनु’ ई देख कान्हाकेँचरणमे शीश अप्पन आ झुकाबैए(बहरे हजज, मात्राक्रम…
प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी ई जीवन दुःख बाबा यौ नाम अहाँ के रटते -रटते ,करबै जीवन अंत यौ.......प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी ई जीवन दुःख बाबा यौआहाँ केर नगरी सुन्दर नगरी ,कोना कय पेबई दरसन यौ कोना -कोना कय हम निहारब ,आहाँक मुख चन्द्र यौ छी हम बहुत अभागल आँहाँ ने भेलहुँ संग यौ.........प्रसाद बुझी हम…
एक दिन दू आदमी के झगड़ा होइत रहैक , जकर गलती रहइ से ओहि ठाम उपस्थित लोक के बेर - बेर दोसर के इंगित कs कहय जे एकर बात पर हमरा देह में आगि लागि जाइत अछि । ओहि लोकक बीच में एकटा पंडीजी सेहो रहथि , ओ कहनलनि बौआ जकरे देह में आगि लगैत छैक सैह ने जड़ैत अछि , इ बात कयको बेर ओकरा कहलाह आ जिनका कहथि ओ बेर बेर…
दुःख हरो द्वारका नाथ शरण मैं तेरी ……. ! मोबाइलक घण्टी बाजल ! स्क्रीन पर चमकै छल “ कनियाँ के फोन ” ! इग्नोरक त प्रश्ने नहि !! धरफरा क फोन उठौलौं ----- हेलौ ! .... कहु ! सब ठिक कि ने ?---- की ठीक ! ... लंच केलौं। ----- हँ ! ..... छौड़ा सब ठिक अछि कि ने ? ------ की ठीक रहत ! ...... जखन स' दर्श स्कूल सँ…
अपना विवाह में बहुत राश संगी साथी के बरियाती जयबाक लेल कहलियनि , एबो केलाह , मुदा एकटा मित्र कहलाह जे जायब त लेकिन दारू पिबे टा करब । हम कहलियनि जे आहा पिबे करब आ पिब क' ताण्डव करबे करब, त' कहलाह जे इहो भ' सकैत अछि । हम कहलियनि जे आहाँ नै जाऊ, कारन आहां हमर प्रतिष्ठा आ अप्पन गामक प्रतिष्ठा दुनु के…
(१)चाहे आहाँ रहु दिल्ली आ मुम्बई,वा रहु देश-विदेशक कोनो कोण में,मैथिल भेटिते मैथिली बाजू टन द' मिठगर बोल में । (२)अमावश्या राति सन मुँह हुनक द्वितिया चान सन दाँत बाजब यदि सुनि लेलहुँ हुनकरत' करिते रहि जायब बात । (३)सन - सन बहय बसातउड़िया रहल अछि, चुनरी…
तर्ज़ : जय जय भैरवि अशुर भयाऊनिजय जय सीता मिथिला तारिणी जनक धिया सुखदाईसुन्दर सुमति दिय हे मातादुःख निवारू माईजय जय सीता मिथिला तारिणी ।अति कोमल राम ह्रिदय वासिनी हनुमत के आहाँ माईरावण राक्षस मारक कारण रामक नाम देखाईजय जय सीता मिथिला तारिणी ।गोर वरन नयन अतिसुंदर मधुर वचन तोर मातापति परमेश्वर मात्र…
ई जे साँझ परलै मैया की हमरे जीवनमे मुनल आँखि तकबै कहिया हमरो जीवनमे।।सगर दुनियाँकेँ चिलका माएक आँचर तर हम अभागल कोना भटकै छी दर-दर।।घुरि, बुझि आबो आबू मनु अबुद्धि नेना अपन सिनेहसँ किएक बिसरलहुँ ऐना।।(मौलिक आ अप्रकाशित)जगदानन्द झा 'मनु'
" यौ गाम बाबू ,सुनलियै , कि कहैत छथिन पिसी दाई । "" कि कहैत छथुन मंजूला बौआ , तोहर पिसी दाई ? "" कहै छथिन जे कतबो पढेबै बेटी के , पाई तय गनहे पडतहू । पढल लिखल बेटी देबई, हुनकर बेटा समकक्ष , तय पाई रूपैया कियैक गनबै ..से कहू तय ..? "" कि कहियौ बात बिचार मिथिला के बौआ , ताहि दिन चूरा दही खुआ कय सभा…
की आहो रामा.....कल जोरी करै छि हे मैया..विनती हमरो सुनियौ ..की आहो रामा...मिथिला के दियौ एअहन सपूत हे जननी..२ मोन में ने छल होई ओकरा..वाणी में बल होई जकरा...की आहो रामा.....भाई के सिनेह स मोन होई पुष्ट हे जननी....२ भ्रम स ग्रसित नै हुवे..श्रम स ओ अम्बर छुवे..की आहो रामा.....बुद्धि विवेक स लुटे सब…