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by SANJAY KUMAR JHA
Aug 11, 2015
(१)चाहे आहाँ रहु दिल्ली आ मुम्बई,वा रहु देश-विदेशक कोनो कोण में,मैथिल भेटिते मैथिली बाजू टन द' मिठगर बोल में ।
(२)अमावश्या राति सन मुँह हुनक द्वितिया चान सन दाँत बाजब यदि सुनि लेलहुँ हुनकरत' करिते रहि जायब बात ।
(३)
सन - सन बहय बसातउड़िया रहल अछि, चुनरी हुनकरछौड़ा सब भेल बताह हुनका लेखे धनो धन सन ।
(४)ककरा करू फज्झति ककरा सँ कलह बेसाहुघुमि रहल अछि काल चक्र एहि मूढ़ के , किछु दिन आर बिसारु । (५)करू ओकरा कात भाई बड्ड चलबैत अछि थोंथि भनें लिखलक ओनाम सँ त ' अछि हमरे पोथी ।
संजय झा "नागदह"
"मौलिक आ अप्रकाशित"
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मैथिली साहित्य
31 members
Description
चरिपतिया
by SANJAY KUMAR JHA
Aug 11, 2015
(१)
चाहे आहाँ रहु दिल्ली आ मुम्बई,
वा रहु देश-विदेशक कोनो कोण में,
मैथिल भेटिते मैथिली बाजू
टन द' मिठगर बोल में ।
(२)
अमावश्या राति सन मुँह हुनक
द्वितिया चान सन दाँत
बाजब यदि सुनि लेलहुँ हुनकर
त' करिते रहि जायब बात ।
(३)
सन - सन बहय बसात
उड़िया रहल अछि, चुनरी हुनकर
छौड़ा सब भेल बताह
हुनका लेखे धनो धन सन ।
(४)
ककरा करू फज्झति
ककरा सँ कलह बेसाहु
घुमि रहल अछि काल चक्र
एहि मूढ़ के , किछु दिन आर बिसारु ।
(५)
करू ओकरा कात भाई
बड्ड चलबैत अछि थोंथि
भनें लिखलक ओ
नाम सँ त ' अछि हमरे पोथी ।
संजय झा "नागदह"
"मौलिक आ अप्रकाशित"