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Description
by जगदानन्द झा 'मनु'
Jul 31, 2013
ई जे साँझ परलै मैया की हमरे जीवनमे मुनल आँखि तकबै कहिया हमरो जीवनमे।।
सगर दुनियाँकेँ चिलका माएक आँचर तर हम अभागल कोना भटकै छी दर-दर।।
घुरि, बुझि आबो आबू मनु अबुद्धि नेना अपन सिनेहसँ किएक बिसरलहुँ ऐना।।
(मौलिक आ अप्रकाशित)
जगदानन्द झा 'मनु'
आदरणीय Saurabh Pandeyजी सादर प्रणाम,
अपनेक दिप्पणी पाबि धन्य भेलहुँ । हम साहित्यक नव-नव विद्यार्धि छी, ताहि कारणे एकर नीक बेजए पक्षसँ अनभिक छी, मोनक उद्गार जे केखनो कए अबैत अछि ओकरा अपनेक सभक सोंझा राखि दै छी । आगू अपनेक सभक संगतमे रहि कए गीत, गजल, कविता आदि विधाक व्याकरणक पक्ष सिखैक चेष्टामे छी । सदिखन अपनेक आशीर्वाद आ सुझाबक प्रतीक्षामे.......
सुन्नर, जगदानन्द जी
Aug 9, 2015
Aug 10, 2015
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जगदानन्द झा 'मनु'
आदरणीय Saurabh Pandeyजी सादर प्रणाम,
अपनेक दिप्पणी पाबि धन्य भेलहुँ । हम साहित्यक नव-नव विद्यार्धि छी, ताहि कारणे एकर नीक बेजए पक्षसँ अनभिक छी, मोनक उद्गार जे केखनो कए अबैत अछि ओकरा अपनेक सभक सोंझा राखि दै छी । आगू अपनेक सभक संगतमे रहि कए गीत, गजल, कविता आदि विधाक व्याकरणक पक्ष सिखैक चेष्टामे छी । सदिखन अपनेक आशीर्वाद आ सुझाबक प्रतीक्षामे.......
Jul 31, 2013
SANJAY KUMAR JHA
सुन्नर, जगदानन्द जी
Aug 9, 2015
kanta roy
Aug 10, 2015