प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी ई जीवन दुःख बाबा यौ
नाम अहाँ के रटते -रटते ,करबै जीवन अंत यौ.......
प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी ई जीवन दुःख बाबा यौ
आहाँ केर नगरी सुन्दर नगरी ,कोना कय पेबई दरसन यौ
कोना -कोना कय हम निहारब ,आहाँक मुख चन्द्र यौ
छी हम बहुत अभागल आँहाँ ने भेलहुँ संग यौ.........
प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी ई जीवन दुःख बाबा यौ
सर्प विचरत अंग -अंग में , बदन चन्दन लेप यौ
साथी बसहा मुड़ी झुलाबे ,गौरी मुख मुस्कान यौ
ज्युँ हम होइतहुँ सेवक आँहाँके , होइतहुँ हम धन्य यौ.......
प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी ई जीवन दुःख बाबा यौ
नाम अहाँ के रटते -रटते ,करबै जीवन अंत यौ
मौलिक और अप्रकाशित
जगदानन्द झा 'मनु'
Sep 20, 2016