एक दिन दू आदमी के झगड़ा होइत रहैक , जकर गलती रहइ से ओहि ठाम उपस्थित लोक के बेर - बेर दोसर के इंगित कs कहय जे एकर बात पर हमरा देह में आगि लागि जाइत अछि । ओहि लोकक बीच में एकटा पंडीजी सेहो रहथि , ओ कहनलनि बौआ जकरे देह में आगि लगैत छैक सैह ने जड़ैत अछि , इ बात कयको बेर ओकरा कहलाह आ जिनका कहथि ओ बेर बेर एकेटा बात कहथि - हमरा देह में आगि लागि जाइत अछि । पंडीजी बाद में ओहि ठाम सँ चलि गेलाह। संजय झा "नागदह"
मैथिली साहित्य
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Description
जकरे देह में आगि लगैत छैक सैह ने जड़ैत अछि (लघुकथा)
by SANJAY KUMAR JHA
Aug 23, 2015
एक दिन दू आदमी के झगड़ा होइत रहैक , जकर गलती रहइ से ओहि ठाम उपस्थित लोक के बेर - बेर दोसर के इंगित कs कहय जे एकर बात पर हमरा देह में आगि लागि जाइत अछि । ओहि लोकक बीच में एकटा पंडीजी सेहो रहथि , ओ कहनलनि बौआ जकरे देह में आगि लगैत छैक सैह ने जड़ैत अछि , इ बात कयको बेर ओकरा कहलाह आ जिनका कहथि ओ बेर बेर एकेटा बात कहथि - हमरा देह में आगि लागि जाइत अछि । पंडीजी बाद में ओहि ठाम सँ चलि गेलाह।
संजय झा "नागदह"
(मौलिक आ अप्रकाशित )