भोजपुरी साहित्य

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शिव भजन (पूर्वी छपरहिया धुन)

भोला की भजsनिया में

मन हमार लागल 

जियुवा पागल भइलें 

भोला में ही मनs अनुरागल 

जियुवा पागल भइलें 

बिच्छू के कुण्डल साँप गर में बिराजेलन 

भभूति रमा के भोला औघड़ लागेलन 

औघड़ लागेलन 

सूते खातिर सेज जिनकर

पाथरे प लागल 

जियुवा पागल भइलें 

भोला में ही मनs अनुरागल 

जियुवा पागल भइलें 

गंगा जटा में जिनके, वस्त्र मृगछाला 

शीश प सजा के चाँद शिव भइलें आला 

शिवजी भइलें आला 

डिमिक डिमिक डम-डम डम-डम

डमक डमरू बाजल 

जियुवा पागल भइलें 

भोला में ही मनs अनुरागल 

जियुवा पागल भइलें 

मंथन से निकलल माहुर गर में सजवलें 

छोड़ दिहलें अमरीत सगरो देव के पियवलें 

देव के पियवलें 

जग के बचाई लिहले

भाग सब क जागल 

जियुवा पागल भइलें 

भोला में ही मनs अनुरागल 

जियुवा पागल भइलें 

भोला की भजsनिया में

मन हमार लागल 

जियुवा पागल भइलें 

भोला में ही मनs अनुरागल 

जियुवा पागल भइलें 

मौलिक एवं अप्रकाशित