भोजपुरी साहित्य

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  • Manan Kumar singh

    #गजल#
    ***
    अइसन मौसम आइल बा
    मनवा अब फगुआइल बा।1

    खिल रहल बा कली गुलाबी
    भौंरा खूब अगराइल बा।2

    टहले के मिलल तब निमन
    नाहीं तब गभुआइल बा।3

    कर रहल मनुहार गुनगुन
    कली अबहीं अलसाइल बा।4

    पाठ पढवलख जब पुरवाई
    कलिया खुल मुसुकाइल बा।5

    रंग-बिरंगी छटा फिजा में
    पलभर में छितराइल बा।6

    चुनरी उड़ल जात हवा में
    बड़गद के हिया जुराइल बा।7

    बहुते उपर उड़ते-उड़ते
    गमछा जाके अझुराइल बा।8

    कह रहल सब लोग चहक के
    अबहिंए फगुआ आइल बा।9
    मौलिक व प्रकाशित@मनन
  • Naveen Mani Tripathi

    एक अवधी ग़ज़ल लिखने का प्रयास 2122 1212 22

    कोई पक्का मकान थोरै है ।
    दिन दशा कुछ ठिकान थोरै है ।।

    सिर्फ कुर्सी मा जान है अटकी ।
    ऊ दलित का मुहान थोरै है ।।

    ई वी ऍम में कहाँ घुसे हाथी।
    छोटा मोटा निशान थोरै है।।

    रोज घुड़की है देत ऐटम का ।
    तुमसे जनता डेरान थोरै है ।।

    लै लिहिस कर्ज पर नया टक्टर।
    कौनो गन्ना बिकान थोरै है ।।

    वोट खातिर पड़ा हैं चक्कर मा ।
    हमरे खातिर हितान थोरै हैं ।।

    रोज दाउद पकड़ि रहे तुम तो।
    कौनो घर मा लुकान थोरै है।।

    नोट बन्दी पे है बड़ा हल्ला ।
    एको रुपया हेरान थोरै है।।

    है कसाई पे अब नज़र टेढ़ी।
    राह तनिको भुलान थोरै है ।।

    अब तो सारा हिसाब हो जाई ।
    तुम से अफसर दबान थोरै है ।।

    है बड़े काम का छोटका योगी।
    अइसे सीना उतान थोरै है ।।

    --नवीन मणि त्रिपाठी
    मौलिक अप्रकाशित
  • Manan Kumar singh

    गजल

    आईं एगो नज़्म भइल बा
    देखीं सब रउए कइल बा।1

    हहरल हियरा रउए खातिर
    इचिको ना एमे मइल बा।2

    नयन मटक्का करते करते
    जिनगी के हर रोज गइल बा।3

    खेले खातिर आके देखीं
    मन के अँगनाढेर फइल बा।4

    मेल बढाईं बात बनी सब
    झगड़ा में अब का धइल बा।5

    आज तिलंगी उड़ते उड़ते
    देखीं रउए पास गइल बा।6

    टूट सकी का धागा कबहूँ ?
    रउए माँझा जोर कइल बा।7
    "मौलिक आ बेप्रकाशित"