"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,

सादर नमन।
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"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।
प्रस्तुत है.....
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133
विषय : विषय मुक्त
अवधि : 29-04-2026 से 30-04-2026
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अति आवश्यक सूचना:-
1. सदस्यगण आयोजन अवधि के दौरान अपनी केवल एक लघुकथा पोस्ट कर सकते हैं।
2. रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना/ टिप्पणियाँ केवल देवनागरी फॉण्ट में टाइप कर, लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड/नॉन इटेलिक टेक्स्ट में ही पोस्ट करें।
3. टिप्पणियाँ केवल "रनिंग टेक्स्ट" में ही लिखें, 10-15 शब्द की टिप्पणी को 3-4 पंक्तियों में विभक्त न करें। ऐसा करने से आयोजन के पन्नों की संख्या अनावश्यक रूप में बढ़ जाती है तथा "पेज जम्पिंग" की समस्या आ जाती है। 
4. एक-दो शब्द की चलताऊ टिप्पणी देने से गुरेज़ करें। ऐसी हल्की टिप्पणी मंच और रचनाकार का अपमान मानी जाती है।आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है, किन्तु बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पाए इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है। देखा गया कि कई साथी अपनी रचना पोस्ट करने के बाद गायब हो जाते हैं, या केवल अपनी रचना के आस पास ही मंडराते रहते हैंI कुछेक साथी दूसरों की रचना पर टिप्पणी करना तो दूर वे अपनी रचना पर आई टिप्पणियों तक की पावती देने तक से गुरेज़ करते हैंI ऐसा रवैया कतई ठीक नहींI यह रचनाकार के साथ-साथ टिप्पणीकर्ता का भी अपमान हैI
5. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति तथा गलत थ्रेड में पोस्ट हुई रचना/टिप्पणी को बिना कोई कारण बताये हटाया जा सकता है। यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
6. रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका, अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल/स्माइली आदि लिखने/लगाने की आवश्यकता नहीं है।
7. प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार "मौलिक व अप्रकाशित" अवश्य लिखें।
8. आयोजन से दौरान रचना में संशोधन हेतु कोई अनुरोध स्वीकार्य न होगा। रचनाओं का संकलन आने के बाद ही संशोधन हेतु अनुरोध करें। 
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मंच संचालक
योगराज प्रभाकर
(प्रधान संपादक)
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    Sheikh Shahzad Usmani

    सादर नमस्कार आदरणीय मंच। इंतज़ार है साथियों की सार्थक रचनाओं का, सहभागिता का। हम भी हैं कोशिश में।

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      Sheikh Shahzad Usmani

      हाड़-मॉंस स्ट्रेट (लघुकथा) :
      "नेता जी, ये क्या हमें बदबूदार सॅंकरी गलियों वाली बस्ती के दौरे करवा रहे हो बार-बार!" प्रचार मण्डली में से एक युवक बोला, "बार-बार यू-टर्न करवा रहे हो!"
      "यही हमारा वो स्ट्रेट है, जो हमें मान-सम्मान और जीत दिलाता है, बेटा!" नेताजी ने अपना गमछा मुॅंह से लपेटते हुए सिर ढॉंककर कहा, "दुनिया में चल रही राजनीति और कूटनीति से बस सीखते चलो, ज़मीन पर, आसमान पर और समुंदर तक में लोग अपने मन की कर डालते हैं!"
      "मतलब वोटों की नाकाबंदी, चुनावी प्रचार की नावों, जहाज़ों और पनडुब्बियों में!" दूसरा युवक बोला।
      "शाबाश, पुत्तर! समझने लगे हो, सब! ये हड्डी-पसली वाले भूखे-प्यासे लोग ही हमारी राजनीति और सत्ता की नींव रहे हैं और रहेंगे! इनकी जद्दोजहद जैसे और चुनावों जैसे युद्धों की तरह लम्बे सीज़फायर वादों और शर्तों पर और जीत अपनी ही हर बार, बस! इनका तेल निकालते रहो, इन्हें बहलाते रहो, बस!" नेताजी ने बस्ती की एक और यू-टर्न वाली सॅंकरी गली में प्रवेश करते हुए खींसे निपोरते हुए कहा। पीछे-पीछे दल चलता रहा।
      (मौलिक व अप्रकाशित)