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अनसुने अनकहे के बीच
on Monday
क्यों दूर हो गए तुम , हमको सजा दिला के
on Saturday
चाहत के इशारे कभी हमको नहीं आते
on Saturday
मैं किसे तो याद करूँ कहो किसे भूलना पड़े है मुझे
on Saturday
लोग ही जब नजर को चुराते रहे
Sep 25
दोस्ती का हाथ हमसे भी
Sep 25
लापता मैं हो गया इक गुमशुदा के वास्ते
Sep 25
जो नाजुक दौर में हिलता रहा है
Sep 25
बद-नसीबी क्या कहें हम आज जो हालत हुई
Sep 25
कातिल मुझे तू शहर का कहते रहा तो है
Sep 25
आज कितनी यहाँ नर्म कमजोर है जिंदगी
Sep 25
तू मुझे धोका दे कम से कम मैं पछता तो सकूँ
Sep 25
कुंडलिया. . . . झोला
Sep 19
भाषा से भी बढ़ इक भाषा
Aug 19
गोस्वामी तुलसीदास जी के प्रति श्रद्धांजलि
Aug 19
सांकल मन के द्वार पर
Jul 27
हरिगीतिका छंद
Jul 24
दोहा पंचक - - - - शोखी
Jul 21
चौपाइयाँ
Jul 14
बरसात
Jul 4
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