Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
" आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन पर आज भी कोई सुधार नहीं है. वही छेड़खानी, लूट, अपहरण जैसी घटनाएं हो रही हैं. जब कि हम गावों में भी…"
आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी क्रम में…See More
अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना, जब होती साकार । काबू में कैसे रहे, मौन मिलन संसार ।। अधरों की मनुहार का, अधर करें अनुवाद । शेष…See More
२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े शरीर आप ही सम्मान हो गये।१। * गुर्बत हटेगी बोल के कुर्सी जिन्हें मिली उनको गरीब लोग ही जल-पान हो गये।२। * घर में बहार नल से जो आयी…See More
दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन ।।उल्फत की दहलीज पर, दिल बैठा हैरान । सोच रहा वह इश्क में, क्या पाया नादान ।।आँसू आहें हिचकियाँ, उल्फत…See More