"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक सुझाव🌹==============================================================
यह जानकर अत्यंत दुःख हुआ कि लगभग 15–16 वर्षों की…"
कुंडलिया. . . . झोलाझोला लेकर हाथ में, चले मुरारी लाल । भाव देख कर थम गई, उनकी बढ़ती चाल ।।उनकी बढ़ती चाल , पसीना टप -टप टपके ।कैसे लें सामान , जेब को लगते झटके ।।भर कर ठंडी साँस…See More
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके द्वारा उल्लेखित पंक्तियों को पुनः पढ़कर आवश्यक परिमार्जन करने का प्रयास करता हूँ. सादर "