"प्रारम्भ (दोहे)
अंत भला तो सब भला, कहते सब ये बात।
क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी शुरुआत।।
हर अच्छे प्रारम्भ का, अच्छा होता अंत।
हो यदि उत्साह भी, निश्चित इति पर्यंत।।
बिन…"
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक लिखना चाहिए था. इस सुन्दर हायकू के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी क्रम में…See More
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की वजह से
दूसरे आपके उपनाम को मैं कई बार शाहिद की जगह त्रुटिवश शहीद लिख दिया था! अतः आप मुझे क्षमा…"
दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों में ही रह गए , हसीं उम्र के साल ।करें अधूरी हसरतें , मन में बड़ा मलाल ।।मुड़ - मुड़ देखे उम्र जो, पीछे…See More
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार।
बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें।
/ये मेरा क्यूँ हुआ है ज़ज़्बाती
पास उनके जो सुनहरा दिल है/
जनाब सुनहरा का वज़्न 122 है, आप चैक कीजियेगा।
/ताज…"
चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश पर चोटी मोर पंख सँग शोभित होती धूलि भरे घुटनों बल चलते यह छवि अति अभिराम कि चल मन अब……………………….कबहुँ…See More