"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। मिसरों में सुधार का प्रयास किया है मार्गदर्शन कीजिए।
//तीर्थ जाना हो गया है सैर जब…"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ। आपके द्वारा इंगित मिसरो में सुधार का प्रयास किया है सम्भव हो तो मार्गदर्शन करने की कृपा करें। आपके असीम…"
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता हूँ
कितने काँटे कितने कंकर हो गये
हर गली जैसे सुख़नवर हो गये
बहुत ही…"
"नव वर्ष की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और सोच की जड़ता पर प्रहार करता आपका यह नवगीत वास्तव में मुझे एक प्रयाण गीत जैसा उद्बोधन करता हुआ प्रतीत हुआ जो अपने उद्देश्य…"