कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी मन को ये क्या हो जाता हैपता नहीं किसी को फर्क पड़ता है या नहीं पर बेटी के लिए बहुत बहुत पड़ जाता है…See More
एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता हैप्यार रूठता नहींप्यार सूख जाता हैवह पहचाना नहीं जाता तबपतझड़ में पत्तों की तरहपीला, सूखा ...…See More
"प्रारम्भ (दोहे)
अंत भला तो सब भला, कहते सब ये बात।
क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी शुरुआत।।
हर अच्छे प्रारम्भ का, अच्छा होता अंत।
हो यदि उत्साह भी, निश्चित इति पर्यंत।।
बिन…"
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक लिखना चाहिए था. इस सुन्दर हायकू के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "