दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार ।।प्यार नाम समर्पण का, इसके अन्तर त्याग ।इसकी सच्ची लाग का, है सच्चा अनुराग ।।प्यार ईश की वन्दना,…See More
"ग़ज़ल बह्र ए मीर
लगता था दिन रात सुनेगा
सब के दिल की बात सुनेगा
अपने जैसा लगता था वो
अपने सब ज़ज़्बात सुनेगा
टिन की छत के बैठ के नीचे
साथ मेरे बरसात सुनेगा
हाँ वो बड़े दिलवाला है तो
सब के…"
बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ से कहो फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे सम्विधान तो पर लोकतंत्र व्यस्त हुआ भेदभाव में।२। * करना था दफ़्न देश ने जिस जातिवाद को फिर से जिला …See More