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आदरणीय अशोक भाईजी,
श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत हरिगीतिका जैसे प्रवहमान छंद में शिव महिमा पढ़ने को मिली. मन धन्य हो गया.
जयकार शिव की कर रहे…"
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.
आप इस पटल के माध्यम से इस प्रस्तुति को सार्थक गजल-विन्यास दे कर वरिष्ठों से सुझाव ले सकते…"
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निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर जी.
कथ्य को सार्थक वियास मिला है
इस बार जो मैं साँकल खोलूँतो आनाद्वार पर तुम ही होना ..…"
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.
सही भी है, प्रकृति के सभी अवयव अपने भौतिक स्वरूप का अपने-अपने हिसाब से नवीनीकरण करते रहते हैं. ऐसे में हमारे संसार का ढंग…"
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति बहुत बधाई. टेक पर प्रयुक्त लॉक,नॉक, ऐडहॉक, डॉक रचना को और भी रोचक बना रहे हैं. सादर "
सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे मन के द्वार तकमेरे दिल की दस्तक नहीं पहुंची ?"दस्तक पहुँचीपहुँची हर बारभाग कर साँकल खोलीकोई था न…See More
हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो हरि नाम लो।यह नाम ही है सत्य मानव, भोर लो नित शाम लो।करते रहो नित भक्ति प्रभु की, नित्य प्रभु आराधना।तब बिन कहे हर एक होगी, पूर्ण मंगल कामना।।…See More