"ग़ज़ल बह्र ए मीर
लगता था दिन रात सुनेगा
सब के दिल की बात सुनेगा
अपने जैसा लगता था वो
अपने सब ज़ज़्बात सुनेगा
टिन की छत के बैठ के नीचे
साथ मेरे बरसात सुनेगा
हाँ वो बड़े दिलवाला है तो
सब के…"
बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ से कहो फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे सम्विधान तो पर लोकतंत्र व्यस्त हुआ भेदभाव में।२। * करना था दफ़्न देश ने जिस जातिवाद को फिर से जिला …See More
"दोहा एकादश. . . . . दिल
दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात ।
बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में रात।।
दिल से दिल की हो गई, दिल ही दिल में बात ।
दिल तड़पा दिल के लिए, मचल गए जज़्बात ।
दिल में दिल…"