दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत ।।अधरों ने की दिल्लगी, अधरों से कल रात ।जिसका डर था हो गई, शर्मीली सी बात ।।बारिश में अच्छा लगे, नजरों को…See More
"आदरणीय अशोक भाईजी,
वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है. भावविभोर मन युवा सुलभ स्मृतियों के आलोड़न में बरबस पींगें लिये जा रहा है. तभी तो प्रस्तुति…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये हैं अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ तुम्हारा। हरपल था सुरभित अति प्यारा।।मन साजन यह कैसे भूले। साथ-साथ तुम हम थे झूले।।*तुम…See More
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
" आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है. किन्तु थोड़ी बारिश में ही नगरों की व्यवस्था ध्वस्त हो गई है. सादर "
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय, अशोक रक्ताले साहब, नमस्कार ! लेकिन यह कैसी "रिमझिम रिमझिम बारिश" है कि नदी नाले उफना जाते है, सड़कों पर पानी बहने लगता है और तो और "…"
Jul 14
Shyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता प्रदान की है. आपकी इस अमूल्य प्रतिक्रिया के लिए आपका हृदय से आभार. सादर "
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल हो चला है.
मानव मन की आकांक्षाएँ सदैव अतृप्त रहती हैं. तभी तो मानवीय विकास का प्रमुख कारण बनती हैं.…"