ग़ज़ल 2122 1212 22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है ज़ज़्बातीपास उनके जो सुनहरा दिल हैताज इक सब के मन के अंदर भीऔर ये शह्र आगरा दिल हैदिल लगी दिल्लगी नहीं…See More
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव की हार्दिक बधाई और हार्दिक शुभकामनाऐं "
Wednesday
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122 1212 22
वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है
कितने दुःख दर्द से भरा दिल है
ये मेरा क्यूँ हुआ है ज़ज़्बाती
पास उनके जो सुनहरा दिल है
ताज इक सब के मन के अंदर भी
और ये शह्र आगरा…"
२२१/२१२१/१२२१/२१२***पीछे गयी है छूट जो होली गुलाल की साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१। * कहने को आयी देश में इक्कीसवीं सदी होली पे भाँग चढ़ती है फिर भी खयाल की।२। * कहने को पर्व रंग का,…See More
"
आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है।
पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी जानकारी और अनुभव से उनमें मत-मंतव्य देखते हैं, ढूँढते हैं। रचनाएँ बहुधा अभिधात्मक नहीं होतीं। वे या…"
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई स्पष्ट संदेश नजर नहीं आया। एकनिष्ट जीवन जीने का संदेश कोई संदेश नहीं माना जा सकता।"