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इस ग्रुप मे धार्मिक साहित्य और धर्म से सम्बंधित बाते लिखी जा सकती है,
by आशीष यादव
12 hours ago
चल मन अब गोकुल के धाम
अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम
कि चल मन अब……………………….
कटि करधनी शीश पर चोटी
मोर पंख सँग शोभित होती
धूलि भरे घुटनों बल चलते
यह छवि अति अभिराम
कबहुँ दूध-दधि-माखन खाते
कबहुँ ग्वाल सँग गाय चराते
कबहुँ अधर पर धर के मुरलिया
सुर छेड़ें अविराम
उनका (प्रभु का) बाल रूप मन भाता
इन रूपों से हृदय जुड़ाता
मोहन इन रूपों में कीजै
मम नैनन विश्राम
कान्हा मोहन किशन कन्हैया
नंदलाल हे रास रचैया
विनती है मेरे होठों पर
हो बस तेरा नाम
मौलिक एवं अप्रकाशित
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धार्मिक साहित्य
121 members
Description
इस ग्रुप मे धार्मिक साहित्य और धर्म से सम्बंधित बाते लिखी जा सकती है,
चल मन अब गोकुल के धाम
by आशीष यादव
12 hours ago
चल मन अब गोकुल के धाम
अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम
कि चल मन अब……………………….
कटि करधनी शीश पर चोटी
मोर पंख सँग शोभित होती
धूलि भरे घुटनों बल चलते
यह छवि अति अभिराम
कि चल मन अब……………………….
कबहुँ दूध-दधि-माखन खाते
कबहुँ ग्वाल सँग गाय चराते
कबहुँ अधर पर धर के मुरलिया
सुर छेड़ें अविराम
कि चल मन अब……………………….
उनका (प्रभु का) बाल रूप मन भाता
इन रूपों से हृदय जुड़ाता
मोहन इन रूपों में कीजै
मम नैनन विश्राम
कि चल मन अब……………………….
कान्हा मोहन किशन कन्हैया
नंदलाल हे रास रचैया
विनती है मेरे होठों पर
हो बस तेरा नाम
कि चल मन अब……………………….
मौलिक एवं अप्रकाशित