मैथिली साहित्य

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अहाँ मुस्कैत रही  हमरा देखैत रही

अहाँकेँ प्रेम गजल नव-नव सुनबैत रही

 

रुसल सजनी जँ रही प्रेमसँ बौसैत रही

सगर गुणगान अहाँक हम गाबैत रही

 

मधुरगर बोल अहाँ सदिखन बाजैत रही

अहाँकेँ सुनि क सिनेहे हम ताकैत रही

 

अहाँ  ढारैत रही डुबि हम पीबैत रही

सुनरकी  संग हिया रसमे तीतैत रही

 

अहाँ जीतैत रही ‘मनु’ हम हारैत रही

पिया मनुहारसँ ई जीवन जीबैत रही

 

(मात्राक्रम : 1222-112-2222-112 सभ पाँतिमे।दोसर शेरक, दोसर पाँतीमे “अहाँक” “क”केँ दिर्घ मानक छूट लेल गेल अछि।)