कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोला

झोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल ।
भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल ।।
उनकी बढ़ती  चाल , पसीना टप -टप टपके ।
कैसे  लें  सामान , जेब  को   लगते   झटके ।।
भर  कर  ठंडी  साँस , मुरारी फिर यह बोला ।
क्या  लेना  सामान , भला  है  खाली  झोला ।।

सुशील सरना / 19-9-26

मौलिक एवं अप्रकाशित