दोस्ती का हाथ हमसे भी

रमल मुसम्मन महज़ूफ़

फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन

2122 2122 2122 212

दोस्ती का हाथ हमसे भी  मिलाते  जाइए

एक गुल जिंदा दिली की बस खिलाते  जाइए

 

मशवरा मै भूलता हूँ कब किसी का आजकल

बेसबब तोहमत  कहीं फिर   ना लगाते जाइए

 

इस सियासत की जड़ें ज्यादा कहीं गहरी  जमी

अब जरा ताकत लगा इसको हिलाते जाइए

 

गर  बगावत का यहाँ  परचम नहीं फहरा सका

बासुरी ही फिर अदावत की बजाते जाइए

 

मै किसी भी मोड पर आकर नहीं मिलता उसे

फिक्र की ये बात है उसको बताते जाइए

 

हाल में तब्दील होने ही लगे माहौल सब

पूछता तफसील से वो गर गिनाते जाइए

 

हम गरीबों  को कहाँ देते हैं हक उनका कभी

फैसला हक में कभी उनके सुनाते जाइए

 

हम नकाबों में  छिपा लेते हैं चेहरा आज भी

आइना इस दौर का लेकिन दिखाते  जाइए

 

दूर मंजिल हो भले चल कर दिखाओ राह  भी

धूल  रस्तों की हमारी अब हटाते  जाइए

 

सुशील यादव दुर्ग