by sushil yadav
Sep 25
रमल मुसम्मन महज़ूफ़
फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन
2122 2122 2122 212
लापता मैं हो गया इक गुमशुदा के वास्ते
मांग लूँ मैं माफियाँ हरदम ख़ता के वास्ते
जिंदगी की राह में खोने लगा है आदमी
खलबली सी है मची शर्मों -हया के वास्ते
जानता हूँ यहाँ मजबुरियाँ हैं आजकल
लोग लड़ने आ गए आबो हवा के वास्ते
बेगुनाहों की तबीयत आज हल्की हो गई
सूलियों उनको चढ़ाया जब सजा के वास्ते
अब बहारों का हमे रुठना समझ आया नहीं
बारहा लड़ता रहा इक इक खिजा के वास्ते
आज मेरे नाम का छोड़ो डंका भी पीटना
मै गनीमत जी रहा तेरी सदा के वास्ते
छोड़ कर तुम देखना मुझको तो हाल ज़ार पर
आज मिटने सा लगा हूँ मै खुदा के वास्ते
सुशील यादव दुर्ग
Cancel
लापता मैं हो गया इक गुमशुदा के वास्ते
by sushil yadav
Sep 25
रमल मुसम्मन महज़ूफ़
फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन
2122 2122 2122 212
लापता मैं हो गया इक गुमशुदा के वास्ते
मांग लूँ मैं माफियाँ हरदम ख़ता के वास्ते
जिंदगी की राह में खोने लगा है आदमी
खलबली सी है मची शर्मों -हया के वास्ते
जानता हूँ यहाँ मजबुरियाँ हैं आजकल
लोग लड़ने आ गए आबो हवा के वास्ते
बेगुनाहों की तबीयत आज हल्की हो गई
सूलियों उनको चढ़ाया जब सजा के वास्ते
अब बहारों का हमे रुठना समझ आया नहीं
बारहा लड़ता रहा इक इक खिजा के वास्ते
आज मेरे नाम का छोड़ो डंका भी पीटना
मै गनीमत जी रहा तेरी सदा के वास्ते
छोड़ कर तुम देखना मुझको तो हाल ज़ार पर
आज मिटने सा लगा हूँ मै खुदा के वास्ते
सुशील यादव दुर्ग