लापता मैं    हो गया इक गुमशुदा के वास्ते

रमल मुसम्मन महज़ूफ़

फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन

 

           2122 2122 2122  212

 

लापता मैं    हो गया इक गुमशुदा के वास्ते

मांग लूँ  मैं माफियाँ  हरदम ख़ता के वास्ते

 

जिंदगी की राह  में खोने लगा है आदमी

 खलबली सी है मची शर्मों -हया  के वास्ते 

 

जानता हूँ यहाँ मजबुरियाँ हैं आजकल

लोग लड़ने आ  गए आबो हवा के वास्ते

 

बेगुनाहों की तबीयत आज हल्की हो गई

सूलियों उनको चढ़ाया जब सजा के वास्ते

 

अब बहारों का हमे रुठना समझ आया नहीं

बारहा  लड़ता रहा इक इक खिजा  के वास्ते

 

आज मेरे नाम का छोड़ो डंका भी पीटना

मै गनीमत जी रहा तेरी सदा  के वास्ते

 

छोड़ कर तुम देखना मुझको तो  हाल ज़ार पर

आज मिटने सा  लगा हूँ मै खुदा के वास्ते

 

सुशील यादव दुर्ग