by Ashok Kumar Raktale
yesterday
बरसात
घन गरजे अंधियारी छाई,
बिजली अम्बर पर इठलाई
बूँदें टपकी टप-टप भाई
रिमझिम रिमझिम बारिश आई
पत्ते खड़के भीगे लरजे
चिड़िया सहमी बादल गरजे,
कुत्ते दुबके गैया भागी
इक नन्हीं सी गुड़िया जागी
सुनकर उसकी तेज रुलाई
सड़कों से बह निकला पानी
राहगीरों ने छतरी तानी,
छप-छप करते कदम बढ़ाते
ठोकर खाते गिरते जाते
बूँदें ले आयीं कठिनाई
रिमझिम-रिमझिम बारिश आई
बनकर वैद्य टटोले नाड़ी
गड्ढ़े में जा बैठी गाड़ी
उफनाया है सूखा नाला
फूट गया जो बाँधा पाला
हर छोटी नाली उफनाई
रिमझिम-रिमझिम बारिश आई।
#
मौलिक/ अप्रकाशित.
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बरसात
by Ashok Kumar Raktale
yesterday
बरसात
घन गरजे अंधियारी छाई,
बिजली अम्बर पर इठलाई
बूँदें टपकी टप-टप भाई
रिमझिम रिमझिम बारिश आई
पत्ते खड़के भीगे लरजे
चिड़िया सहमी बादल गरजे,
कुत्ते दुबके गैया भागी
इक नन्हीं सी गुड़िया जागी
सुनकर उसकी तेज रुलाई
रिमझिम रिमझिम बारिश आई
सड़कों से बह निकला पानी
राहगीरों ने छतरी तानी,
छप-छप करते कदम बढ़ाते
ठोकर खाते गिरते जाते
बूँदें ले आयीं कठिनाई
रिमझिम-रिमझिम बारिश आई
बनकर वैद्य टटोले नाड़ी
गड्ढ़े में जा बैठी गाड़ी
उफनाया है सूखा नाला
फूट गया जो बाँधा पाला
हर छोटी नाली उफनाई
रिमझिम-रिमझिम बारिश आई।
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मौलिक/ अप्रकाशित.