by Sushil Sarna
yesterday
दोहा पंचक. . . . . शोखी
शोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत ।।
अधरों ने की दिल्लगी, अधरों से कल रात ।जिसका डर था हो गई, शर्मीली सी बात ।।
बारिश में अच्छा लगे, नजरों को संवाद ।इच्छाओं का मन करे, मिल कर फिर अनुवाद ।।
हल्की- हल्की जब पड़ी, यौवन पर बौछार ।प्रणय निवेदन में गया, तन ही तन से हार ।।
मिलने की बेताबियाँ, नजरों के अनुरोध ।उन्मादों में कब हुआ, सही - गलत का बोध ।।
सुशील सरना / 21-7-26
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दोहा पंचक - - - - शोखी
by Sushil Sarna
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दोहा पंचक. . . . . शोखी
शोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।
भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत ।।
अधरों ने की दिल्लगी, अधरों से कल रात ।
जिसका डर था हो गई, शर्मीली सी बात ।।
बारिश में अच्छा लगे, नजरों को संवाद ।
इच्छाओं का मन करे, मिल कर फिर अनुवाद ।।
हल्की- हल्की जब पड़ी, यौवन पर बौछार ।
प्रणय निवेदन में गया, तन ही तन से हार ।।
मिलने की बेताबियाँ, नजरों के अनुरोध ।
उन्मादों में कब हुआ, सही - गलत का बोध ।।
सुशील सरना / 21-7-26