दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखी

शोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।
भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत ।।

अधरों ने की दिल्लगी, अधरों से कल रात ।
जिसका डर था हो गई, शर्मीली सी बात ।।

बारिश में अच्छा लगे, नजरों को संवाद ।
इच्छाओं का मन करे, मिल कर फिर अनुवाद ।।

हल्की- हल्की जब पड़ी, यौवन पर बौछार ।
प्रणय निवेदन में गया, तन ही तन से हार ।।

मिलने की बेताबियाँ, नजरों के  अनुरोध ।
उन्मादों में कब हुआ, सही - गलत का बोध ।।

सुशील सरना / 21-7-26