रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए

जंगल का कानून है पहला, चुप रहिए

मँहगाई से पागल जनता, चुप रहिए

पूँजीपति को सारी सुविधा, चुप रहिए

 

प्रश्न किया तो कह देंगे गद्दार सभी

अवतारी है अपना राजा, चुप रहिए 

राजसभा में न्याय खड़ा है घुटनों पर

कर दीजै फूलों की वर्षा, चुप रहिए

सच को फाँसी पर लटकाया राजा ने,

झूठ न बोला जाय तो भैया, चुप रहिए 

एलमुनियम गुजराती, रस्सी अमरीकी

राजा ने पहना जो पट्टा, चुप रहिए

रूह मचलती है गर सच कह देने को,

होठों पर जड़ कर लीजै ताला, चुप रहिए

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मौलिक एवं अप्रकाशित

  • Manjeet kaur

    धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा !
    यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई