by सुरेश कुमार 'कल्याण'
Mar 31
दरियादिल हो बाप जब, करता कन्यादान।
दयावान भगवान हो, रखता उसका मान।
रखता उसका मान, भात नरसी-सा भरता।
आठ पहर धन-धान्य, वस्त्र की वर्षा करता।
कहते कवि 'कल्याण', मिले तब जीवन साहिल।
करके कन्यादान, दिखाए जब दरियादिल।।
मौलिक एवं अप्रकाशित
आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद
छंद की अंतिम दोनों पंक्तियों की संप्रेषणीयता पर तनिक और समय देना अपेक्षित है.
हार्दिक बधाई
May 6
आदरणीय सुरेश जी नमस्कार ।
बढ़िया छंद रचा गया है।
हार्दिक बधाई।
May 11
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सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद
छंद की अंतिम दोनों पंक्तियों की संप्रेषणीयता पर तनिक और समय देना अपेक्षित है.
हार्दिक बधाई
May 6
आशीष यादव
आदरणीय सुरेश जी नमस्कार ।
बढ़िया छंद रचा गया है।
हार्दिक बधाई।
May 11