by सुरेश कुमार 'कल्याण'
Mar 31
दरियादिल हो बाप जब, करता कन्यादान।
दयावान भगवान हो, रखता उसका मान।
रखता उसका मान, भात नरसी-सा भरता।
आठ पहर धन-धान्य, वस्त्र की वर्षा करता।
कहते कवि 'कल्याण', मिले तब जीवन साहिल।
करके कन्यादान, दिखाए जब दरियादिल।।
मौलिक एवं अप्रकाशित
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कुंडलिया
by सुरेश कुमार 'कल्याण'
Mar 31
दरियादिल हो बाप जब, करता कन्यादान।
दयावान भगवान हो, रखता उसका मान।
रखता उसका मान, भात नरसी-सा भरता।
आठ पहर धन-धान्य, वस्त्र की वर्षा करता।
कहते कवि 'कल्याण', मिले तब जीवन साहिल।
करके कन्यादान, दिखाए जब दरियादिल।।
मौलिक एवं अप्रकाशित