by amita tiwari
May 14
बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
मौलिक व अप्रकाशित"
आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर बना रहा है.
हर बंद में जाती वस्तुतः जातीं होना चाहिए. कि,आपने औरतें का प्रयोग किया है, जो बहुवचन संज्ञा है.
जानकी वम क्यों नहीं जाती... के स्थान् अपर जानकी बन क्यों नहीं जातीं होना चाहिए.
शुभ-शुभ
Cancel
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर बना रहा है.
हर बंद में जाती वस्तुतः जातीं होना चाहिए. कि,आपने औरतें का प्रयोग किया है, जो बहुवचन संज्ञा है.
जानकी वम क्यों नहीं जाती... के स्थान् अपर जानकी बन क्यों नहीं जातीं होना चाहिए.
शुभ-शुभ
May 14