by Sushil Sarna
5 hours ago
दोहा सप्तक. . . . प्यार
प्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार ।।
प्यार नाम समर्पण का, इसके अन्तर त्याग ।इसकी सच्ची लाग का, है सच्चा अनुराग ।।
प्यार ईश की वन्दना, प्यार जगत् का सार ।प्यार दिखावे से परे, प्यार मौन शृंगार ।।
निहित नहीं है प्यार में, नफरत की दुर्गंध ।इसके भावों में छुपे, प्रेम गीत के बंध ।।
प्यार रूह इसरार की, प्यार नहीं इंकार ।गहरा होता प्यार में, प्यार भरा अभिसार ।।
संकेतों में व्यक्त हो , मौन प्रणय मनुहार ।कैसे फिर हो प्यार से, इस दिल को इंकार ।।
पावन सच्चे प्यार का, मिलनाहै संजोग ।प्यार तपस्या रूह की, प्यार नहीं है भोग ।।
सुशील सरना / 16-2-26
मौलिक एवं अप्रकाशित
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दोहा सप्तक. . . . प्यार
by Sushil Sarna
5 hours ago
दोहा सप्तक. . . . प्यार
प्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।
आपस का विश्वास ही, इसका है आधार ।।
प्यार नाम समर्पण का, इसके अन्तर त्याग ।
इसकी सच्ची लाग का, है सच्चा अनुराग ।।
प्यार ईश की वन्दना, प्यार जगत् का सार ।
प्यार दिखावे से परे, प्यार मौन शृंगार ।।
निहित नहीं है प्यार में, नफरत की दुर्गंध ।
इसके भावों में छुपे, प्रेम गीत के बंध ।।
प्यार रूह इसरार की, प्यार नहीं इंकार ।
गहरा होता प्यार में, प्यार भरा अभिसार ।।
संकेतों में व्यक्त हो , मौन प्रणय मनुहार ।
कैसे फिर हो प्यार से, इस दिल को इंकार ।।
पावन सच्चे प्यार का, मिलनाहै संजोग ।
प्यार तपस्या रूह की, प्यार नहीं है भोग ।।
सुशील सरना / 16-2-26
मौलिक एवं अप्रकाशित