बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ से कहो फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे सम्विधान तो पर लोकतंत्र व्यस्त हुआ भेदभाव में।२। * करना था दफ़्न देश ने जिस जातिवाद को फिर से जिला दिया है उसे ताव-ताव में।३। * खतरा नहीं है घाव से मरहम से है मगर हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में।४। * सम्पन्न देश हो न हो इतना तो हो मगर जीवन कटे न एक भी इसमें अभाव में।५। * आजाद मुल्क मान लो इतना भी हो अगर सच का पड़े न साथ जो तजना दबाव में।६। * संसद में सत्य बोलना सुनना रुचेगा क्यों देते वचन जो झूठ हैं बढ़चढ़ चुनाव में।७।
हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
yesterday
बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में
आये कमी कहाँ से कहो फिर दुराव में।१।
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अवसर समानता का कहे सम्विधान तो
पर लोकतंत्र व्यस्त हुआ भेदभाव में।२।
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करना था दफ़्न देश ने जिस जातिवाद को
फिर से जिला दिया है उसे ताव-ताव में।३।
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खतरा नहीं है घाव से मरहम से है मगर
हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में।४।
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सम्पन्न देश हो न हो इतना तो हो मगर
जीवन कटे न एक भी इसमें अभाव में।५।
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आजाद मुल्क मान लो इतना भी हो अगर
सच का पड़े न साथ जो तजना दबाव में।६।
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संसद में सत्य बोलना सुनना रुचेगा क्यों
देते वचन जो झूठ हैं बढ़चढ़ चुनाव में।७।
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मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'