दोहा सप्तक. . . .नैन

दोहा सप्तक. . . . नैन

नैन द्वन्द्व में नैन ही, गए नैन से हार ।
नैनों को मीठी लगे, नैनों से तकरार ।।

नैनों की तकरार है, बड़ा अजब आनन्द ।
हृदय पृष्ठ पर प्रेम के,  अंकित होते छन्द ।।

नैनों के संवाद की, होती मोहक नाद ।
नैन सुने बस नैन के, अनबोले संवाद ।।

नैनों की होती सदा, मौन सुरों में बात ।
नैनों की मनुहार में, बीते सारी रात ।।

बड़ा मनोरम नैन का, होता है संसार ।
नैनों के इसरार को, नैन करें स्वीकार ।।

नैन उदधि में प्रेम का, जब आता तूफान ।
नैन उतारें लाज का, हौले से परिधान ।।

नैन करें जब नैन से, अंतरंग अभिसार ।
हो जाते फिर नैन के, मौन स्वप्न साकार ।।

सुशील सरना / 3-2-26

मौलिक एवं अप्रकाशित