by Sushil Sarna
on Tuesday
दोहा सप्तक. . . . नैन
नैन द्वन्द्व में नैन ही, गए नैन से हार ।नैनों को मीठी लगे, नैनों से तकरार ।।
नैनों की तकरार है, बड़ा अजब आनन्द ।हृदय पृष्ठ पर प्रेम के, अंकित होते छन्द ।।
नैनों के संवाद की, होती मोहक नाद ।नैन सुने बस नैन के, अनबोले संवाद ।।
नैनों की होती सदा, मौन सुरों में बात ।नैनों की मनुहार में, बीते सारी रात ।।
बड़ा मनोरम नैन का, होता है संसार ।नैनों के इसरार को, नैन करें स्वीकार ।।
नैन उदधि में प्रेम का, जब आता तूफान ।नैन उतारें लाज का, हौले से परिधान ।।
नैन करें जब नैन से, अंतरंग अभिसार ।हो जाते फिर नैन के, मौन स्वप्न साकार ।।
सुशील सरना / 3-2-26
मौलिक एवं अप्रकाशित
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दोहा सप्तक. . . .नैन
by Sushil Sarna
on Tuesday
दोहा सप्तक. . . . नैन
नैन द्वन्द्व में नैन ही, गए नैन से हार ।
नैनों को मीठी लगे, नैनों से तकरार ।।
नैनों की तकरार है, बड़ा अजब आनन्द ।
हृदय पृष्ठ पर प्रेम के, अंकित होते छन्द ।।
नैनों के संवाद की, होती मोहक नाद ।
नैन सुने बस नैन के, अनबोले संवाद ।।
नैनों की होती सदा, मौन सुरों में बात ।
नैनों की मनुहार में, बीते सारी रात ।।
बड़ा मनोरम नैन का, होता है संसार ।
नैनों के इसरार को, नैन करें स्वीकार ।।
नैन उदधि में प्रेम का, जब आता तूफान ।
नैन उतारें लाज का, हौले से परिधान ।।
नैन करें जब नैन से, अंतरंग अभिसार ।
हो जाते फिर नैन के, मौन स्वप्न साकार ।।
सुशील सरना / 3-2-26
मौलिक एवं अप्रकाशित