by Sushil Sarna
yesterday
कुंडलिया. . . .
किसने समझा आज तक, मुफलिस का संसार ।आँखें उसकी वेदना, नित्य करें साकार ।।नित्य करें साकार , दर्द यह कहा न जाता ।उसे भूख का दंश , सदा ही बड़ा सताता ।।पत्थर पर ही पीठ , टिकाई हरदम इसने ।भूखी काली रात , भाग्य में लिख दी किसने ।।
सुशील सरना / 9-1-26
मौलिक एवं अप्रकाशित
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कुंडलिया. . . . .
by Sushil Sarna
yesterday
कुंडलिया. . . .
किसने समझा आज तक, मुफलिस का संसार ।
आँखें उसकी वेदना, नित्य करें साकार ।।
नित्य करें साकार , दर्द यह कहा न जाता ।
उसे भूख का दंश , सदा ही बड़ा सताता ।।
पत्थर पर ही पीठ , टिकाई हरदम इसने ।
भूखी काली रात , भाग्य में लिख दी किसने ।।
सुशील सरना / 9-1-26
मौलिक एवं अप्रकाशित