by Saurabh Pandey
yesterday
जिस-जिस की सामर्थ्य रही है धौंस उसी की एक सदा से एक कहावत रही चलन में भैंस उसीकी जिसकी लाठी मनमर्जी थोपी जाती है नहीं चली तो तोड़ें काठी अहंकार मद भरे विचारों उड़ें हवा में वे गर्दा से .. हठ में अड़ना, जबरन भिड़ना और झूठ रच मन की करना निर्बल अबलों या नन्हों में नाहक वीर बने घुस लड़ना मद में ऐंठे गरमी झोंकें लफ्फाजी भी यदा-कदा से खरबूजे का मीठा बाना चक्कू से छिलता-कटता है ऐसा ही कर देते उसकी जो भी अपनों से बँटता है काटे बाँटें वे मारे हैं धमक बना कर घृणित-अदा से ***मौलिक और अप्रकाशित
Cancel
सदस्य टीम प्रबंधन
नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
by Saurabh Pandey
yesterday
जिस-जिस की सामर्थ्य रही है
धौंस उसी की
एक सदा से
एक कहावत रही चलन में
भैंस उसीकी जिसकी लाठी
मनमर्जी थोपी जाती है
नहीं चली तो तोड़ें काठी
अहंकार मद भरे विचारों
उड़ें हवा में
वे गर्दा से ..
हठ में अड़ना, जबरन भिड़ना
और झूठ रच मन की करना
निर्बल अबलों या नन्हों में
नाहक वीर बने घुस लड़ना
मद में ऐंठे गरमी झोंकें
लफ्फाजी भी
यदा-कदा से
खरबूजे का मीठा बाना
चक्कू से छिलता-कटता है
ऐसा ही कर देते उसकी
जो भी अपनों से बँटता है
काटे बाँटें वे मारे हैं
धमक बना कर
घृणित-अदा से
***
मौलिक और अप्रकाशित