सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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ता-उम्र जिसने सत्य को देखा नहीं कभी
मत उसको बोल पक्ष में बोला नहीं कभी।१।
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भूले हैं सिर्फ  लोग  न  सच को निहारना
हमने भी सच है सत्य पे सोचा नहीं कभी।२।
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आदत पड़ी हो झूठ की जब राजनीति को
दिखता है सच, जबान पे आता नहीं कभी।३।
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बस्ती में सच की झूठ को मिलता है ठौर पर
सच को तो  झूठ  आस  भी देता नहीं कभी।४।
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जनता को सत्य  कैसे  भला रास आएगा
सच सा हुआ है एक भी राजा नहीं कभी।५।
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तन्हा मिलेगा पथ में 'मुसाफिर' से बोल दे
सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी।६।
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मौलिक/अप्रकाशित
- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

  • Sushil Sarna

    वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति हुई है आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । हार्दिक बधाई