दोहा पंचक. . . . .दीपावली

 

दीप जले हर द्वार पर, जग में हो उजियार  ।
आपस के सद्भाव से, रोशन हो संसार ।।

 

एक दीप इस द्वार पर,एक पास के द्वार ।
आपस के यह प्रेम ही, हरता हर अँधियार ।।

 

जले दीप से दीप तो, प्रेम बढ़े हर द्वार  ।
भेद भाव सब दूर हों , खुशियाँ मिलें अपार ।।

 

माँ लक्ष्मी का कीजिए, पूजन संग गणेश ।
सुख समृद्धि बढ़ती सदा, मिटते सभी कलेश ।

 

लाल चुनरिया पहन कर, मैया आई द्वार ।
पूजित कर हर्षित हुआ, पूरा घर परिवार ।।

सुशील सरना / 20-10-25

मौलिक एवं अप्रकाशित 


  • सदस्य टीम प्रबंधन

    Saurabh Pandey

    आदरणीय सुशील सरना जी, 

    दीप जले हर द्वार पर, जग में हो उजियार ...           जग दिखता उजियार 
    आपस के सद्भाव से, रोशन हो संसार ।।

     

    एक दीप इस द्वार पर,एक पास के द्वार ।   ...........    एक दूसरे द्वार 
    आपस के यह प्रेम ही, हरता हर अँधियार ।।  ....      आपस का यह प्रेम ही 

     

    जले दीप से दीप तो, प्रेम बढ़े हर द्वार  ।
    भेद भाव सब दूर हों , खुशियाँ मिलें अपार ।।  ..        बढिया 

     

    माँ लक्ष्मी का कीजिए, पूजन संग गणेश ।
    सुख समृद्धि बढ़ती सदा, मिटते सभी कलेश । ....       कलेश क्लेश का देसज रूप है 

     

    लाल चुनरिया पहन कर, मैया आई द्वार ।  ............    ’पहन कर’ में तकनीकी समस्या है. और चुनरिया या चुनरी ओढ़ी जाती है, पहनते नहीं 
    पूजित कर हर्षित हुआ, पूरा घर परिवार ।। 

    दीपावली के अवसर पर रचित इस दोहावली के लिए हार्दिक बधाई 

  • Sushil Sarna

    आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सृजन की समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दुओं का भविष्य में ध्यान रखा जायेगा । आपका मार्गदर्शन बहुमूल्य है । हार्दिक आभार आदरणीय जी