" आदरणीय, तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा ओ.बी.ओ को.प्रवहमान रखने का संकल्प दृढ़ है तो, कोई समाधान निकल ही आयेगा । समस्या…"
सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई जगाबैएजखन बाजै मधुर मुरली मुरारीकेँतखन ई संग राधाकेँ नचाबैएसलोना श्याम हे चितचोर मोहन छीकरेजक चैन ई…See More
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग लगातार आते गए और काम करते गए। कविता कोश की तरह आर्थिक समस्या को खुले योगदान के माध्यम से हल किया जा सकता…"
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी दृष्टि में समापन संवाद में और रचना के पूरे प्रवाह और कथोपकथन में लघुकथा के कथ्य का प्रवाह और…"