"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति बहुत बधाई. टेक पर प्रयुक्त लॉक,नॉक, ऐडहॉक, डॉक रचना को और भी रोचक बना रहे हैं. सादर "
सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार तकमेरे दिल की दस्तक नहीं पहुंची ?"दस्तक पहुँचीपहुँची हर बारभागा, भाग कर गयासाँकल खोलीकोई था न द्वार…See More
हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो हरि नाम लो।यह नाम ही है सत्य मानव, भोर लो नित शाम लो।करते रहो नित भक्ति प्रभु की, नित्य प्रभु आराधना।तब बिन कहे हर एक होगी, पूर्ण मंगल कामना।।…See More
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से आभार. सादर "
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी ! 'साजना' शब्द के प्रयोग से मैं स्वयं भी बहुत संतुष्ट नहीं था किन्तु किसी शीघ्रता में वह बदलाव नहीं हो…"
दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत ।।अधरों ने की दिल्लगी, अधरों से कल रात ।जिसका डर था हो गई, शर्मीली सी बात ।।बारिश में अच्छा लगे, नजरों को…See More
"आदरणीय अशोक भाईजी,
वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है. भावविभोर मन युवा सुलभ स्मृतियों के आलोड़न में बरबस पींगें लिये जा रहा है. तभी तो प्रस्तुति…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"