For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • Male
  • बाग़पत, उत्तर प्रदेश.
  • India
Share

अमीरुद्दीन 'अमीर''s Friends

  • Aazi Tamaam
  • Dimple Sharma
  • Anil Kumar Singh
  • रवि भसीन 'शाहिद'
  • Abrar Ahmed
  • Krish mishra 'jaan' gorakhpuri
  • Samar kabeer
 

अमीरुद्दीन 'अमीर''s Page

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rahul Dangi Panchal's blog post ग़ज़ल खुशी तेरे पैरों की चप्पल रही है
"जनाब राहुल दांगी पांचाल जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। चन्द अशआर ग़ज़लियत के ऐतबार से बदलाव के हामिल हैं - 'कहीं कोई तो बात है साथ उसके - यार उसमें   कमी बेवफ़ा की बड़ी खल रही है'  'परेशान…"
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post तुम्हारे इन्तज़ार में ........
"छोड़ न दें साँसेंकहीं काया कुटीर कोतुम्हारे इन्तज़ार में।  वाह! क्या शब्दावली है, लाजवाब। आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, एक और शानदार कृति के लिए बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें। सादर। "
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post वक्त के सिरहाने पर ......
"वाह, बहुत ख़ूब! जनाब सुशील सरना जी आदाब, भावपूर्ण सुंदर रचना हुई है बधाई स्वीकार करें। 'देखता रहा मैं देर तक' के संदर्भ में देखें -  जाने कितने वादे कसमों की चौखट पर चरमरा रहे थे     (मेरे ख़याल से)   सादर।"
4 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post उस रात ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, भावनाओं के समुद्र में गोते लगाती आपके अपने अंदाज़ की सुंदर रचना हुई है, हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर। "
5 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"मुहतरम समर कबीर साहिब आदाब, भुजंगप्रयात छंद पर आधारित आपकी तृतीय रचना शानदार प्रदर्शन है, आपका साहित्य के प्रति ये प्यार और समर्पण न केवल अतुल्य एवं अनुकरणीय है अपितु सभी सीखने वालों के लिए उत्कृष्ट उदाहरण एवं प्रेरणा का स्रोत है जनाब सौरभ पाण्डेय…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (हुस्न तो  मिट जाएगा...)
"जनाब आशीष यादव जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति, ज़र्रा नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया।  सादर।"
Tuesday
आशीष यादव commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (हुस्न तो  मिट जाएगा...)
"आदरणीय श्री अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब सादर नमस्कार।  बेहतरीन गजल पर मुबारकबाद स्वीकार कीजिए।"
Tuesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दयाराम मेठाणी जी आदाब, सुंदर छंद सृजना के लिए बधाईयाँ स्वीकार करें। गुणीजनों की बातों पर ग़ौर कीजियेगा। सादर।"
Tuesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"मुहतरमा दीपांजलि दुबे जी आदाब, सुंदर छंद सृजना के लिए बधाईयाँ। जनाब समर कबीर साहिब की विस्तृत टिप्पणी बड़े काम की है, इसके लिए उनका धन्यवाद। सादर। "
Tuesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब आशीष यादव जी आदाब, सुंदर छंद सृजना के लिए आपको बधाई हो।  सादर। "
Tuesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी आदाब, छंद रचना पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार।  सादर। "
Tuesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"//आशय यह है कि जो जैसा है, उसे वैसे ही रहने दिया जाय// "सहमत"  शुभ-शुभ ।"
Tuesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"सभी सम्मानित पाठकगण से सादर निवेदन है कि चूंकि गुणी और विद्वज्जनों की टिप्पणियों और सुझावों के आलोक में मेरी यह प्रस्तुति भुजंगप्रयात छंद के नियम और विधानानुसार शुद्ध नहीं है अतः इस प्रस्तुति को भुजंगप्रयात छंद पर आधारित छन्द-रचना के रूप में ही देखा…"
Monday
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"उक्त लिंक पर तुकांतता पर आदरणीय बहुत उपयोगी जानकारी प्रदान की गई है। धन्यवाद। "
Monday
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"मुहतरम समर कबीर साहिब आदाब, छंद रचना पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत शुक्रिया, मुहतरम आपके विश्वास और उत्साहवर्धन ने मुझे उत्साह और ऊर्जा से भर दिया है। स्नेह बनाए रखिएगा।  सादर। "
Monday
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी आदाब, अच्छी छंद रचना हुई है बधाई स्वीकार करें। व्याकरण की दृष्टि से कुछ शब्दों पर संशय है, जैसे बताई, पाई, बढें वो, पढें जो आदि पर गुणीजनों के मार्गदर्शन की प्रतीक्षा रहेगी।  सादर। "
Monday

Profile Information

Gender
Male
City State
BAGHPAT , UTTAR PRADESH.
Native Place
BARAUT
Profession
Private job
About me
उर्दु शायरी हिन्दी में लिखने और पढ़ने का शौक़ है॥

अमीरुद्दीन 'अमीर''s Blog

ग़ज़ल (हुस्न तो  मिट जाएगा...)

2122 -  2122 -  2122 - 212

 

हुस्न तो  मिट जाएगा  फिर भी अदा रह जाएगी 

ढल  चलेगी  ये  जवानी  पर  वफ़ा  रह  जाएगी 

साथ मेरे  तुम हो जब  तक प्यार की  सौग़ात है 

बिन तुम्हारे  ज़िन्दगी ये  इक सज़ा  रह  जाएगी 

जब तलक  माँ-बाप राज़ी  बस दुआ मक़्बूल है 

दिल दुखा तो फ़र्श पर  ही  हर दुआ रह जाएगी 

ईद का दिन है  तेरी  रहमत भी  है अब जोश में 

मेरे जैसों की भी झोली  ख़ाली क्या रह जाएगी

कर भलाई  के भी…

Continue

Posted on September 12, 2021 at 10:38pm — 4 Comments

ग़ज़ल (मेरी माँ)

2122 - 2122 



तू  शफ़ीक़-ओ-मह्रबाँ  है

तुझसा माँ  कोई कहाँ  है



तेरे आँचल  का  ये साया 

मुझको जन्नत का गुमाँ है



तेरा  दामन  मेरी  दुनिया 

और क़दम सारा जहाँ है



रंज हो या  हो ख़ुशी बस

तू सदा  ही ख़ुश-बयाँ  है



बिन  तेरे  ये  ज़िन्दगी तो

ख़ाक है या फिर धुआँ है    



तेरे  दामन  के ये  रौज़न    

माँ  ये  मेरी कहकशाँ …

Continue

Posted on September 12, 2021 at 2:35pm — 4 Comments

मुसल्सल ग़ज़ल (नसीहत प्यार की)

2122 - 2122 - 212

करते हो  इतनी जो  ये तकरार  तुम

कैसे  दिलबर  के  बनोगे   यार  तुम 

तौलते   हो   प्यार   भी   मीज़ान  में 

प्यार को समझे हो क्या व्यापार तुम 

इश्क़ में जब तक  न  होगी हाँ में हाँ 

हो  नहीं  सकते  कभी  दिलदार तुम 

हम-ज़बाँ हों इश्क़ में - पहला सबक़ 

सीख कर  करना  वफ़ा इज़हार तुम

जानेमन जज़्बात  को  समझे  बिना  

पा नहीं सकते किसी का  प्यार तुम

दिल के…

Continue

Posted on September 7, 2021 at 5:59pm — 13 Comments

ग़ज़ल (ख़ून की जब तक ज़रूरत थी मेरे चाहा मुझे)

2122 - 2122 - 2122 - 212

ख़ून  की  जब  तक  ज़रूरत  थी  मेरे  चाहा  मुझे 

बा'द अज़ाँ  बस दूध  की मक्खी समझ फेंका मुझे 

उसने जब मंज़िल  की जानिब गामज़न पाया मुझे 

तंज़   से  मा'मूर  नफ़रत   की   नज़र   देखा  मुझे 

हक़-ब-जानिब  बढ़ गए  जब ये  क़दम रुकते नहीं 

मुश्किलों  ने  बढ़के  यूँ  तो  लाख  रोका  था  मुझे 

अपने अहसाँ के 'इवज़ वो कर गया ख़ूँ का हिसाब 

यारो …

Continue

Posted on August 31, 2021 at 10:55pm — 2 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:21pm on March 9, 2020, Samar kabeer said…

जनाब अमीरुद्दीन साहिब,ओबीओ पर आपका स्वागत है,मैं हर ख़िदमत के लिए हाज़िर हूँ ।

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted blog posts
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rahul Dangi Panchal's blog post ग़ज़ल खुशी तेरे पैरों की चप्पल रही है
"जनाब राहुल दांगी पांचाल जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। चन्द अशआर ग़ज़लियत के…"
2 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post उम्मीद .......
"आदरणीय समर कबीर जी आदाब, सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर"
2 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बेबसी.........
"आदरणीय समर कबीर साहब , आदाब - सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर"
2 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post वक्त के सिरहाने पर ......
"आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब, आदाब - सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय ।बहुत सुंदर सुझाव…"
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post तुम्हारे इन्तज़ार में ........
"छोड़ न दें साँसेंकहीं काया कुटीर कोतुम्हारे इन्तज़ार में।  वाह! क्या शब्दावली है, लाजवाब। आदरणीय…"
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post वक्त के सिरहाने पर ......
"वाह, बहुत ख़ूब! जनाब सुशील सरना जी आदाब, भावपूर्ण सुंदर रचना हुई है बधाई स्वीकार करें। 'देखता…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on babitagupta's blog post विश्व पटल पर हिन्दी का परचम लहराया
"आदरणीया बबिता जी, आपके आलेख को एक बार में पढ़ गया. इस प्रयास के लिए बधाई.  लेकिन कुछ सुझाव…"
4 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post उस रात ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, भावनाओं के समुद्र में गोते लगाती आपके अपने अंदाज़ की सुंदर रचना हुई है,…"
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post निज भाषा को जग कहे (दोहा गजल) - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"पिछले आठ-दस वर्षों से दोहा-ग़ज़ल का प्रभाव विशेष रूप से बढ़ा है. और दोहा छंद ही क्यों, अरूज़ जिसके…"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post उस रात ....
"आदरणीय सुशील सरना जी, प्रस्तुति में भावमय शृंगारिक संयोगों के मधुरिम क्षणों का रोचक शाब्दिक…"
10 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

ग़ज़ल

1222 1222 1222मिला था जो हमें पल खो दिया हमनेमुलायम नर्म मखमल खो दिया हमने ।*बचा रख्खे हैं यादों के…See More
13 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service