For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

झूम के देखो सावन आया ....

खुशियों की सौगातें लाया

झूम के देखो सावन आया

 

चंचल सोख़ हवा इतराई

बारिश की बौछारें लाई

महक उठा अब मन का आँगन

भीनी भीनी सी खुशबू छाई

 

देख छटा हर मन हर्षाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

 

मन की बगिया महक रही है

पंछी बन के चहक रही है

इच्छाओं को पंख मिल गए

दिल की धड़कन बहक रही है

 

मौसम में है खुमार छाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

धरती बाहों को फैलाये

अपना आँचल भी लहराये

उमड़ पड़े हैं नदियाँ नाले

आसमान अमृत बरसाये

 

सबको ऐसा उत्सव भाया

झूम के देखो सावन आया....

 

 

धीरे धीरे गरजो मेघा

खेतों में ही बरसो मेघा

छत टूटी कच्ची दीवारें

उलझन को कुछ समझो मेघा

 

रौद्र रूप से जी घबराया

झूम के देखो सावन आया ....

 

बगियाँ सारी खिली खिली हैं

हर डाली में एक कली है

पत्ते भी अब राग सुनायें

तेज़ हवाएँ खूब चली हैं

 

कुदरत ने क्या रंग दिखाया

झूम के देखो सावन आया....

 

ले किसान हल निकल पड़े हैं

बैल भी अब तैयार खड़े हैं

मिट्टी में आ गई जवानी

अब खेतों में मोती जड़े हैं

 

उम्मीदों की चाबी लाया

झूम के देखो सावन आया....

 

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 339

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by नाथ सोनांचली on August 16, 2018 at 1:41pm
आद0 नादिर खान जी सादर अभिवादन। गीत का अच्छा प्रयास हुआ है। कहीं-कहीं लय भंग है, गुनगुनाते रहें तो वह भी दूर हो जाएगी। गुणीजनों की बातों को संज्ञान में लीजिये। मेरी बधाई स्वीकार कीजिये
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 16, 2018 at 1:12pm

आ. भाई नादिर जी, सुंदर गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।

Comment by नादिर ख़ान on August 15, 2018 at 4:06pm

आदरणीया बबीता जी हौसला अफजाई का शुक्रिया ....

Comment by नादिर ख़ान on August 15, 2018 at 4:05pm

आदरणीय समर साहब बेशकीमती सुझाओं के लिए बहुत शुक्रिया आपका .... पहली बार गीत लिखने की कोशिश की है ।

Comment by babitagupta on August 15, 2018 at 3:21pm

उम्दा पंक्तियाँ वरखा रानी की बहार पर,बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।

Comment by Samar kabeer on August 15, 2018 at 2:57pm

जनाब नादिर ख़ान साहिब आदाब,सावन के मौसम पर गीत का अच्छा प्रयास हुआ है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

'चंचल सोख़ हवा इतराई'

इस पंक्ति में 'सोख़' को "शौख़" कर लें ।

' भीनी भीनी सी खुशबू छाई'

ये पंक्ति लय में नहीं है,इसे यूँ कर लें:-

"भीनी भीनी ख़ुश्बू छाई"

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हवा भी दिलजली होगी-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

१२२२/१२२२ जहाँ पर रोशनी होगी वहीं पर तीरगी होगी।१। * गले तो  मौत  के लग लें खफ़ा पर जिन्दगी…See More
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आख़िर
"आ. भाई ब्रिजेश जी, अभिवादन। बहुत खूबसूरत गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
13 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-आख़िर

1222     1222     1222      1222छुड़ाया  चाँद ने  दामन अँधेरी  रात में  आख़िरपरेशां  हूँ कमी  क्या है…See More
20 hours ago
Ram Ashery posted a blog post

हम होगें कामयाब

आज अपने मकसद को पाने में हम होगें कामयाब मन में रख विश्वास, महामारी से जंग जीत जायेगें कुदरत के…See More
20 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
" जी, प्रतिभा जी, आपने सही  कहा ! विषय को दृष्टिगत रखते हुए अच्छा  प्रयास  है…"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"इस सकारात्मक गीत सृजन पर हार्दिक बधाई आदरणीय चेतन प्रकाश जी"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी   ये एक छंदमुक्त/ अतुकान्त रचना है। सादर"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"हार्दिक आभार आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"आदरणीया, प्रतिभा  पांडे  जी, नमस्कार ! रचना  किस विधा  में है, आपने, विदुषी,…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
" आ. भाई लक्ष्मण जी सप्रेम  व॔दे ! आप का अतिशय  आभार  कि आप …"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई शून्य आकाशी जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए धन्यवाद।"
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service