For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आम  हूँ  बौरा रहा हूँ

पीर में  मुस्का रहा हूँ

मैं नहीं दिखता बजट में

हर  गज़ट पलटा रहा हूँ  

फल रसीले बाँट कर बस

चोट को सहला रहा हूँ

गुठलियाँ किसने गिनी हैं

रस मधुर बरसा रहा हूँ

होम में जल कर, सभी की

कामना पहुँचा रहा हूँ

द्वार पर तोरण बना मैं

घर में खुशियाँ ला रहा हूँ

कौन पानी सींचता है

जी  रहा खुद गा रहा हूँ

मीत उनको “कल” मुबारक

“आज” मैं जीता रहा हूँ

“खास” का अस्तित्व रखने

“आम” मैं कहला रहा हूँ

 

(मौलिक व अप्रकाशित)

 

Views: 344

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 2, 2015 at 6:57pm

छोटी बहर में बहुत ,बेहतरीन गजल कही है आदरणीय अरुण जी. आपके अंदाज ने आम को आम न रहने दिया, ख़ास बना दिया. तहे दिल से बधाई लीजियेगा

Comment by Hari Prakash Dubey on March 2, 2015 at 12:54pm

आदरणीय अरुण निगम जी बहुत सुन्दर गजल है ,हार्दिक बधाई आपको !सादर

आम  हूँ  बौरा रहा हूँ

पीर में  मुस्का रहा हूँ

मैं नहीं दिखता बजट में

हर  गज़ट पलटा रहा हूँ 

फल रसीले बाँट कर बस

चोट को सहला रहा हूँ.......शानदार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 2, 2015 at 11:29am

आदरणीय अरुण भाई , छोटी बहर मे बहुत बढिया गज़ल हुई है । दिली मुबारक बाद कुबूल करें ॥

Comment by khursheed khairadi on March 2, 2015 at 10:28am

फल रसीले बाँट कर बस

चोट को सहला रहा हूँ

गुठलियाँ किसने गिनी हैं

रस मधुर बरसा रहा हूँ

“खास” का अस्तित्व रखने

“आम” मैं कहला रहा हूँ

आदरणीय अरुण निगम सर ,उम्दा ग़ज़ल हुई है ,,बज़ट पर त्वरित प्रतिक्रिया |आम के आम गुठलियों के दाम ....ग़ज़ल भी और समीक्षा भी ....मज़ा आ गया |सादर अभिनन्दन |

Comment by Nirmal Nadeem on March 1, 2015 at 11:19pm
बहुत खूब बहुत खूब वाह वाह

एक बार दूसरा व् पांचवां शेर देख लीजिये
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 1, 2015 at 11:10pm

लाजव़ाब क्या कहने!! आदरणीय अरुण निगम जी इस गजल के माध्यम से आपका प्रथम परिचय पा रहा हूँ!

गजब की गजल है...इतनी ताजगी लिए गजल बहुत दिनों बात सुनी!! सुने सुनाए शब्दों से हटकर!!


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 1, 2015 at 9:32pm

क्या कहने आदरणीय अरुण निगम जी, एक एक शेर उम्दा ख्याल से लबरेज है, छोटी बहर में ऐसी खुबसूरत ग़ज़ल पढ़ मन आनंदित है. कुछ डाउट वज्न को लेकर है ...

गज़ट, हवन को 21 और जिजिविषा को 212 में बांधना मुझे समझ नहीं आया. बहरहाल इस ग़ज़ल हेतु ढेरों दाद कुबूल करें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 1, 2015 at 9:16pm
आदरणीय अरुण सर क्या खूब रचना है हर शेर अपना अलग ही असर छोड़ रहा है बहुत बहुत बधाई आपको
Comment by somesh kumar on March 1, 2015 at 8:02pm

वाह ,वास्तविकता से लबरेज़ तंज़ |खुद को आम-आम कहकर मलाई खाने वालों पर और बिना शिकायत आम बने रहकर दुनिया को बढ़ाने वालों की हकीकत कहने के लिए |दिली दाद |

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 1, 2015 at 7:42pm

आम  हूँ  बौरा रहा हूँ

पीर में  मुस्का रहा हूँ -  -  वाह ! जब ख़ास को मतले में चुन लिया में आम से ख़ास हो गए | क्या तरकीब लगाईं है 

“खास” का अस्तित्व रखने

“आम” मैं कहला रहा हूँ | -  वाह ! बेहतरीन गजल रचना के  लिए बधाई  श्री अरुण निगम  भाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post समझा बताओ किसने किताबों ने जो कहा-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"क्या बात क्या बात क्या बात "
3 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कहता था हम से देश को आया सँभालने-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"बहुत बढ़िया  सृजन "
3 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कम है-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर" (गजल)
"बहुत खूबसूरत "
3 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ज़ुबान कुछ शिकायती भी कीजिए कभी कभी (133 )
" लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी ,  जी, आद. आपका अनमोल आशीर्वाद पा कर मेरा…"
3 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ज़ुबान कुछ शिकायती भी कीजिए कभी कभी (133 )
"Aazi Tamaam  साहेब आपकी हौसला आफ़जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया एवं सादर नमन | "
3 hours ago
Aazi Tamaam commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ज़ुबान कुछ शिकायती भी कीजिए कभी कभी (133 )
"बेहद सुंदर ग़ज़ल है सर सादर प्रणाम आ तुरन्त जी"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करने को नित्य पाप जो-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, सराहना व मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद। इस मिसरे को यूँ…"
yesterday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: उठाकर शहंशाह क़लम बोलता है
"सादर प्रणाम आ धामी सर हौसला अफ़ज़ाई के लिये सहृदय शुक्रिया सर ख़तम की जगह बे दम और वहम की जगह सितम…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post इस को जरूरी रात में कोई जगा रहे-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई आजी तमाम जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थित व उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post इस को जरूरी रात में कोई जगा रहे-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थित व उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कहता था हम से देश को आया सँभालने-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए आभार ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: उठाकर शहंशाह क़लम बोलता है
"आ. भाई आजी तमाम जी, सादर अभिवादन । गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई।  भाई नीलेश जी की बात…"
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service