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जो तेरी है कहानी वही मेरी दास्ताँ

221 2121 1221 212

जो तेरी है कहानी वही मेरी दास्ताँ

मैं भी अकेला और तू भी तन्हा है वहाँ

 

हर गाम मुँह चिढ़ाती हुई ज़िन्दगी हमें

हैरान मेरा दिल है परेशान तेरी जाँ

 

जो तेरी रहगुज़र है नहीं रास्ता मेरा

कोई खिंचाव तो है मगर अपने दरमियाँ

 

कुछ ख्वाब नातमाम अधूरी सी हसरतें

हो बेकरार तुम भी वहाँ और मैं यहाँ

 

ग़मगीन तुम उदास मैं भी हूँ “शकूर” और

खामोश ये जहान है चुप-चुप सा आसमाँ

 

-मौलिक व अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on February 12, 2015 at 10:00pm
हौसलाअफ़्ज़ाई के लिए आप सभी का
बहुत बहुत शुक्रिया

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 3, 2015 at 6:09pm

जो तेरी रहगुज़र है नहीं रास्ता मेरा

कोई खिंचाव तो है मगर अपने दरमियाँ

ग़मगीन तुम उदास मैं भी हूँ “शकूर” और

खामोश ये जहान है चुप-चुप सा आसमाँ  -- बहुत बढिया शे र हुआ है , आदरणीय शिज्जु भाई , हार्दिक बधाई ।

Comment by Dr. Vijai Shanker on February 3, 2015 at 10:27am
आदरणीय शिज्जु शकूर जी , कुछ अलग सी खूबसूरत ग़ज़ल , बधाई, सादर।
Comment by khursheed khairadi on February 3, 2015 at 10:09am

जो तेरी रहगुज़र है नहीं रास्ता मेरा

कोई खिंचाव तो है मगर अपने दरमियाँ

आदरणीय शिज्जु सर ,उम्दा ग़ज़ल हुई है |सादर अभिनन्दन |

Comment by दिनेश कुमार on February 2, 2015 at 8:56pm
बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई है भाई शकूर जी, वाह वाह

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 2, 2015 at 8:17pm

आदरणीय शिज्जु भाई जी, बेहतरीन ग़ज़ल हुई है बधाई. 

Comment by Hari Prakash Dubey on February 2, 2015 at 7:42pm

आदरणीय शिज्जू "शकूर"जी सुन्दर रचना

ग़मगीन तुम उदास मैं भी हूँ “शकूर” और

खामोश ये जहान है चुप-चुप सा आसमाँ.... ..... बहुत सुन्दर, बधाई !


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 2, 2015 at 11:37am

ग़ैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल कहने का उम्दा प्रयास वह भी इस कठिन काफिया के साथ, गज़ब गज़ब गज़ब. उर्दू लफ्जों के बारे में कम जानकारी के चलते एक डाउट है. 

शब्द जान = जां या जाँ है.

दास्तां या दास्ताँ 

बधाई इस अभिव्यक्ति पर आदरणीय शिज्जू भाई जी.

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