For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बालपन की मस्तियाँ ....(.नवगीत) सीमा हरि शर्मा

* बालपन की मस्तियाँ *

इंद्रधनुषी रंग उतरे
हैं फलक पर से जमीं
बालपन की मस्तियों में
रंग सारे चुन रहे।

मन लुभाती हैं सदा ही
तोतली सी बोलियाँ
बात बेमतलब भले पर
शब्द मिसरी गोलियाँ
फूल झरते ओंठ से सब
तोल मोलों से परे
बस करें अपने दिलों की
ना किसी की सुन रहे।...बालपन की मस्तियों में

सर्द शामें पैर नंगे
फर्श पर जब दौड़ते
घुमती पीछे तभी माँ
चप्पलों को हाथ ले
चूमती है गाल ढककर
माँ कभी आँचल तले
शीत गरमी हो भले बस
खेल की ही धुन रहे।....बालपन की मस्तियों में

जुगनुओं को कैद करना
छिप-छिपाकर हाथ में
छोड़ देना बंद करके
दीप सारे रात में
है सभी खुशियाँ जहाँ की
रौशनी नन्ही तले
चाह चंदा की नहीं ना
स्वपन सूरज बुन रहे।......बालपन की मस्तियों

सीमा हरि शर्मा 22.11.2014 (मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 698

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by seemahari sharma on December 4, 2014 at 10:53am
आभार आ.shardindu mukerji जी रचना को आपका आशीर्वाद मिला सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on December 4, 2014 at 2:15am

इस नवगीत की पंक्तियों में एक मादकता है जो हमें झूमने को मजबूर करती है.

Comment by seemahari sharma on November 27, 2014 at 12:12pm
आदरणीय योगराज प्रभाकर जी अभिभूत हूँ आपकी प्रतिक्रिया से आपकी प्रशंशा से रचनाधर्मिता को प्रोत्साहन मिला है आपसे सदैव ही मार्गदर्शन की आशा करती हूँ आशीर्वाद बनाएं रखें सादर

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 27, 2014 at 11:33am

//जुगनुओं को कैद करना
छिप-छिपाकर हाथ में
छोड़ देना बंद करके
दीप सारे रात में//

वाह वाह !! बालपन की मस्तियों को क्या ही सुन्दर शब्दों में ढाला है इस नवगीत के माध्यम से आ० सीमा हरि शर्मा जी। हार्दिक बधाई प्रेषित है।

Comment by seemahari sharma on November 24, 2014 at 10:43pm
आदरणीय Vijay Nikore जी बहुत बहुत आभार आपने रचना को समय दिया आपकी प्रशंसा से निश्चय ही प्रोत्साहन मिला है आशीर्वाद बनाएं रखें सादर।
Comment by vijay nikore on November 24, 2014 at 9:08am

अति सुन्दर नवगीत के लिए बधाई।

Comment by seemahari sharma on November 23, 2014 at 6:48pm
आदरणीय Vijay Prakash Sharma जी बहुत बहुत आभार आपने रचना को सराहा सादर
Comment by seemahari sharma on November 23, 2014 at 6:46pm
आदरणीय Er Ganesh jee 'Bagi' ह्रदय से आभार आपने गीत को सराहा रचनाकर्म सार्थक रहा आपकी प्रतिक्रिया से बहुत प्रोत्साहन मिला सादर

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 23, 2014 at 5:02pm

क्या बात है आदरणीया सीमाहरी जी, बहुत ही सुंदर नवगीत प्रस्तुत हुआ है, बहुत बहुत बधाई .

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on November 22, 2014 at 8:10pm

बहुत सुन्दर रचना है - सीमा जी बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

असली - नकली. . . .

असली -नकली . . . .सोच समझ कर पुष्प पर, अलि होना आसक्त ।नकली इस मकरंद पर  , प्रेम न करना व्यक्त…See More
4 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें,…"
4 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (...महफ़ूज़ है)
"आदरणीय सुधीजन पाठकों ग़ज़ल के छठवें शे'र में आया शब्द "ज़र्फ़मंदों" को कृपया…"
9 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"पुन: आगमन पर आपका धन्यवाद। "
10 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी posted a blog post

ग़ज़ल (...महफ़ूज़ है)

2122 - 2122 - 2122 - 212वो जो हम से कह चुके वो हर बयाँ महफ़ूज़ हैदास्तान-ए-ग़ीबत-ए-कौन-ओ-मकाँ…See More
10 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post रूप(लघुकथा)
"आदरणीय महेंद्र जी, लघुकथा को आपने इज्जत बख्शी। आपका शुक्रिया। "
10 hours ago
Mahendra Kumar commented on Manan Kumar singh's blog post रूप(लघुकथा)
"व्यक्ति के कई रूप होते हैं। इस बात को रेखांकित करती हुई अच्छी लघुकथा लिखी है आपने आ. मनन जी।…"
11 hours ago
Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"कोई बात नहीं। रचना पर अन्तिम निर्णय लेखक का ही होता। एक बार पुनः बधाई। "
12 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया, जनाब…"
12 hours ago
Mahendra Kumar commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post मरती हुई नदी (नवगीत)
"पर्यावरणीय चिन्ताओं पर बढ़िया नवगीत लिखा है आपने आ. धर्मेन्द्र जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। कृपया…"
14 hours ago
Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"वैसे दूसरा शेर बेहतर हो सकता है।"
14 hours ago
Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. अमीरुद्दीन जी। हार्दिक बधाई प्रेषित है। "
14 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service