For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

चिर निद्रा से जाग युवा कब तक सोएगा

चिर निद्रा से जाग युवा कब तक सोएगा

देख हताशा की मिट्टी मन में लिपटी है
स्वार्थ सिद्धि में लिप्त भावना भी सिमटी है
ले आओ तूफान के मिट्टी ये उड़ जाए
मन का दिव्य प्रकाश देख तम भी घबराए

कब तक अनुमानों के दुनिया मे खोएगा
चिर निद्रा से जाग युवा कब तक सोएगा


स्वाभिमान खो गया तुम्हारा क्यूँ ये बोलो
तनमन से नंगे होकर तुम जग भर डोलो  
संस्कार मर्यादाओं का भान नहीं है
यकीं मुझे आया के तू इंसान नहीं है
   
जन्म से रोता आया क्या अब भी रोएगा ??
चिर निद्रा से जाग युवा कब तक सोएगा

 

 

बहुत तरक्की कर ली प्यारी धरती भूले

क्या पतझर सावन हर ऋतू में झूले झूले

राजनीती कर रहा है या कुर्सी का दंगल  

काट काट के जंगल तू करता है मंगल

 

गंगा मैली कर दी कैसे पाप धोएगा

चिर निद्रा से जाग युवा कब तक सोएगा

 

 

इन्कलाब की जब तब दिल में बिजली कौंधे

पड़े सड़क पर देखा फिर मुँह बाए औंधे

सोचो किसने प्यारे सारे सपने रौंदे

उसको ये अधिकार भला फिर से तू क्यों दे

 

काटेगा तू वो ही प्यारे जो बोयेगा

चिर निद्रा से जाग युवा कब तक सोएगा

 

संदीप पटेल “दीप”

 

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 483

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 20, 2013 at 12:25am

यह प्रस्तुति रुटीनी सी हो गयी है.

कि की जगह के  का प्रयोग कितना व्यावहारिक और सैद्धांतिक है ? कुछ व्याकरणीय अशुद्धियाँ भी

दिख गयीं..  जैसे दुनिया पुल्लिंग नहीं स्त्रींलिंग है. 

शुभेच्छाएँ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 16, 2013 at 5:53pm

आदरणीय सन्दीप भाई , गफलत से जगाती बहुत सुन्दर गीत रचना के लिये आपको बधाई ॥ 

दो एक पंक्तियों मे गेयता अटक रही है , शायद मात्रा मे फर्क हो , देख लीजियेगा !

गंगा मैली कर दी कैसे पाप धोएगा ,  

और

उसको ये अधिकार भला फिर से तू क्यों दे - ॥

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 16, 2013 at 2:35pm

ले आओ तूफान के मिट्टी ये उड़ जाए 
मन का दिव्य प्रकाश देख तम भी घबराए ....आदरणीय पटेल जी सचेत करती हुई , जागरूक करती हुई ..रचना ..एक सार्थक सन्देश अपने अंतस में समाहित किये हुए //इस सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई ..सादर 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 16, 2013 at 2:00pm

पटेल जी

आपकी उद्बोधन कविता उत्साहवर्धक  है i

बधाई हो i

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं (135 )
" भाई   लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी आपकी हौसला आफजाई के लिए बहुत बहुत…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Mamta gupta's blog post जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करते
"आ. ममताजी, गजल केप्रयास व ओबीओ परिवार में सम्मिलित होने होने के लिए हार्दिक बधाई।"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं (135 )
"आ. भाई गिरधारी सिह जी, खूबसूरत गजल हुई है । हार्दिक बधाई स्वीकारें ।"
8 hours ago
Aazi Tamaam posted a blog post

ग़ज़ल: उठाकर शहंशाह क़लम बोलता है

122 122 122 122उठाकर शहंशह क़लम बोलता हैचढ़ा दो जो सूली पे ग़म बोलता हैये फरियाद लेकर चला आया है…See More
10 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं (135 )

ग़ज़ल( 11212 11212 11212 11212 )जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैंन है बर्ग-ए-गुल…See More
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

मौत का भय है न जिनको जुल्म वो सहते नहीं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

2122/2122/2122/212है नहीं क्या स्थान जीवन भर ठहरने के लिएजो शिखर चढ़ते हैं सब ही यूँ उतरने के…See More
10 hours ago
Samar kabeer commented on Mamta gupta's blog post जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करते
"मुहतरमा ममता गुप्ता 'नाज़' जी आदाब,ओबीओ पटल पर आपका स्वागत है । ग़ज़ल का प्रयास अच्छा…"
14 hours ago
Deependra Kumar Singh updated their profile
14 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आख़िर
"आदरणीय उपाध्याय जी हार्दिक आभार आपका..."
16 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल ( हो के पशेमाँ याद करोगे)
"जनाब आज़ी 'तमाम' साहिब आदाब, जी हाँ ख़ुदा का शुक्र है सब ठीक है आज़ी साहिब। ग़ज़ल पर आपकी…"
19 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -ख़ुद को ऐसे सँवार कर जागा
"धन्यवाद आ. ममता जी "
19 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -ख़ुद को ऐसे सँवार कर जागा
"धन्यवाद आ. समर सर "
19 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service