For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मुआवज़ा दे दिया और काम ख़तम...

क़लम कोमा मे आ गयी है मेरी,

ब्रेनस्ट्रोक ज़बरदस्त लगा है इसको,
रगों मे दौड़ती स्याही पे बड़ा प्रेशर है,
क्या लिखे, क्या ना लिखे, कितना चले, कैसे चले,
सुना था तेज़ चलेगी ये तलवार से भी,
इस दफ़ा खुद ही कट के रह गयी ज़ुबान इसकी,
कोई राजा है नाम का मगर पिशाच है वो,
नहीं रघुराज का, प्रताप है रावण का वो,
तोड़ देता है वो उंगली जो उठी हो उस पर,
फोड़ देता है वो आँखे ,उसे तरेरे जो,
क्या मज़ाल कर ले कोई ओवरटेक गाड़ी उसकी,
कुचल देता है पल में ऐसा कर के देखे कोई,
करोड़ों रखे है , फिर भी भूखा है अभी,
काले धंधों की फेहरिस्त का कोई छोर नही,
मर्डर, किडनॅपिंग हो या गाँव जलाना हो कोई,
बेअसर उस पर है पोटा का सोटा भी,
राह चलते हुए देखो उसे तो पाप लगे,
वज़ीर बन के गया बैठ कोढ़ मे खाज हुई,
रख दिया हाथ सर पे सूबे के हाकिम ने भी ,
वाह क्या कहना अब तो हर तरह से मौज हुई,
फँस गया इस दफ़ा फरिश्ता एक चंगुल मे,
जैसे भटका हुआ हिरण हो कोई जंगल में,
ज़िया-उल-हक़ था जिया करता था वो हक़ के लिए,
था वफ़ादार वतन का बिका ना किसी के लिए,
गो कि वो बिक गये सिपाही, जो थे साथ गये,
अकेले छोड़ चले आए मौत के मुँह मे,
जाने क्या बीती उस पर,किसने बाँध कर मारा,
पहले बेकार किए पैर फिर सीने पर मारा,
वो बहादुर निहत्था वहीं शहीद हुआ,
सब जानते हैं, किसके इशारे पर ये काम हुआ,
उसकी परवीन को अब कौन हक़ दिलाएगा,
लाख रोए पटक के सर , ना अब वो आएगा,
महज़ तेरह महीनों का सुहाग लाई थी,
पचीस लाख का चेक चूड़ीयाँ ना ला पाएगा,
कोई इस्तीफ़ा कोई जाँच सी बी आई की,
उसकी चूनर में अब तारे ना लगा पाएगा,
करो कुछ ऐसा कि शहादत ना यूँ बेकार जाए,
जो होता आया है वो अब यहीं पे रुक जाए,
जिनके दामन पे हों ख़ूं के अनगिनत धब्बे,
उनको अहलकार बनने से रोका जाए,
महज़ इस्तीफ़ा नही ब्लॅकलिस्ट कर दें उन्हें,
काले धंधों औ करतूतों की घनी जाँचें हों,
है हक़ हर किसी को जानने का आर टी आई के तहत,
उम्मीदवार है जो उसके माज़ी के साए.
चोर हो तो सड़े जेलों में खूनी फाँसी चढ़े,
ना कि मासूम ,निर्दोषों को हलकान करे,
चैन से जीने का, खुली हवा में सांस लेने का,
सभी को हक़ है किसी से ना ये छीना जाए,
है लोकतंत्र सबका, सबके द्वारा, सबके लिए.
तानाशाही का अंत तो क्रांति से होना ही है,
ना रोना अब तू ऐ परवीन कसम हिम्मत की तुझे,
शहीद हो गया वो शहादत तेरी है हुई,
गवाह तारीख है,हिटलर, सद्दाम ओसामा की,
खुदा के घर मे देर ज़रूर , अंधेर नही...

Views: 248

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 7, 2013 at 12:18pm

न्याय व्यवस्था की बेबसी, क्या कर्मशील के लिए कोई बेबसी नहीं होती, मद्रास हाईकोर्ट में जस्टिस च्नाद्रू औसतन ६० फैसले रोज 

सुनारे है (देखे मेरी राधना "काम करे निष्काम-लक्ष्मण लडीवाला") रचना के  कथ्य के लिए बधाई सरिता सिन्हा जी 

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on March 7, 2013 at 7:18am

दिन प्रतिदिन बढ़ते अपराध से मन बहुत ही दुखी है! कही कोई लगाम नहीं लग रही. न्याय ब्यवस्था की बेबसी भी अजीब है कि सजा भी नहीं मिलती जल्द किसी भी अपराधी को..... 

Comment by ram shiromani pathak on March 6, 2013 at 7:40pm

हार्दिक बधाई इस रचना पर.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"जी जनाब सादर"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"सादर नमस्कार। बहुत-बहुत शुक्रिया रचना पटल पर अमूल्य समय देकर मार्गदर्शक व प्रोत्साहक टिप्पणी हेतु…"
yesterday
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"सादर प्रणाम आ सौरभ जी नग़मा का विन्यास व मर्म बेहद साफ़ साफ़ स्पष्ट हो रहा है सर शुरू के शै र में…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"भाई आज़ी 'तमाम' जी आपकी पटल पर पाठकीय उपस्थिति ही आपको विधा की.ओर.भी खींच ले जायेगी।…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"भाई आजी जी, आपकी रचना का मर्म आश्वस्त कर रहा है. बधाइयाँ. किंतु विन्यास को नहीं समझ पा रहा…"
yesterday
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"हाइकू के बारे में जानकारी तो नहीं है पर आ शेख साहब पढ़कर अच्छी लगी  सादर"
yesterday
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"बेहद रोचक छंद है आ प्रतिभा जी विषय को सार्थक बनाते हुए सादर"
yesterday
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"सहृदय शुक्रिया आ प्रतिभा जी सराहना के लिये दिल से शुक्रिया सादर"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"वाह वाह वाह !  भाई शेख शहज़ाद जी, कमाल का प्रयास हुआ है. आपने हाइकु को एक चरण और दिया है कहूँ,…"
yesterday
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"शुक्रिया आ शेख जी हौसला अफ़ज़ाई के लिये सहृदय प्रणाम सादर"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"दोनों मुक्तकों से सार्थक अर्थ संप्रेषित हो रहे हैं, आदरणीया.  बधाई !! "
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"चाहतों की ठौर! - [अतुकान्त (दूसरी प्रस्तुति)] : किशोर हो या युवा मनघर-परिवार पर भारीया घर-परिवार उस…"
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service