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अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

2×15

कोशिश इतनी भी मत कीजे यादों को झुठलाने में ।
आँखों मे आँसू भर जायेगे ज्यादा मुस्काने में।

और भी कोई चीज़ बची है क्या तेरे मैखाने में,
सारे ग़म तो मिला दिए तूने मेरे पैमाने में।

बरस हज़ारों बीत गए हो जैसे तुझको देखे बिना,
बीस साल की गिनती तो मैं गिनता हूँ अनजाने में।

कोई फैसला लिखने बैठेगा तो उससे पूछूगा,
सारी गवाही पूरी हैं या देर है उनके आने में।

इतना पता मिल जाता बस वो सही सलामत रहते हैं,
अब तो लाख तरीके हैं खबरें लाने ले जाने में।

वो दिलकश मुस्कान निगाहों से ओझल होती ही नहीं,
दुनिया ने तो कोई कसर न छोड़ी मुझे जलाने में।

बच्चों का दुख देख के भी जालिम का कलेजा न पिघला।
साल कई फिर बढा दिये घर वापस मेरे जाने में।

मेरी ग़ज़ल उस तक पहुँचें तो कुछ हासिल हो लिखने का,
यें अल्फ़ाज तो खो जाते हैं दुनिया के वीराने में।

रात के बारह बजने को हैं अब तो सो जाओ अहसास,
तन्हाई को तंग करते हो दिल की आह सुनाने में।

मौलिक और अप्रकाशित

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