For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

समय का पहिया  - लघुकथा -

समय का पहिया  - लघुकथा - 

सुशीला ने घर परिवार और समाज के विरोध के बावजूद एक राजपूत लड़के को अपना हमसफ़र बनाने का निर्णय किया। समूचा वैश्य समाज हतप्रभ था उसके इस फ़ैसले पर। लड़का राजपूत वह भी फ़ौज में अफ़सर। सारी बिरादरी लड़की के भाग्य को कोस रही थी। माँ ने तो रो रो कर घर आँसुओं से भर दिया था। उनकी एक ही चिंता थी कि एक बनिये की बेटी राजपूत परिवार में कैसे निभा पायेगी। 

अंततः समाज ने लड़की का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। लड़के ने तो जैसे तैसे अपने घर वालों को राजी कर लिया क्योंकि लड़की एक डाक्टर थी। लेकिन अभी वह इस विवाद के चलते प्रैक्टिस  नहीं कर रही थी। 

होनी बड़ी बलवान होती है। उसको कौन टाल सकता है।शादी को अभी दो साल भी पूरे नहीं हुए थे कि लड़का युद्ध में एक विमान हादसे में शहीद हो गया। लड़की की सासु माँ ने सारा दोष लड़की पर मढ़ दिया। यह अभागी है जो मेरे बेटे को खा गई। इसे अभी इसी वक्त घर से निकाल दो। 

सुशीला का मन इन बातों से तार तार हो गया। उसे घर से निकाला जाए इससे पहले ही वह अपने थोड़े बहुत सामान के साथ निकल पड़ी। 

माँ बाप को जैसे ही जानकारी मिली वे बेटी को लेने पहुँच गये।

"चल बेटी सुशीला, अपने घर चल। हम तुझे लेने आये हैं।

"माँ , आप लोगों ने जब मेरा सामाजिक बहिष्कार किया था  तभी मेरा बेटी होने का रिश्ता  समाप्त हो गया था।

"कैसी बात करती है? वह तेरा घर है।हम तेरा ब्याह अपनी बिरादरी में कर देंगे।

"शादी का तो प्रश्न ही नहीं उठता। मेरे पास मेरे प्यार की निशानी है। अब मैं अपना घर खुद बनाऊंगी।" 

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 264

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by TEJ VEER SINGH on December 30, 2021 at 9:28am

हार्दिक आभार आदरणीय धामी जी।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 17, 2021 at 10:10pm

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। बहुत खूबसूरत लघुकथा हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by TEJ VEER SINGH on December 13, 2021 at 11:04am

हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब जी। आदाब।

Comment by TEJ VEER SINGH on December 13, 2021 at 11:03am

हार्दिक आभार आदरणीय अमीरुददीन 'अमीर' साहब जी।

Comment by Samar kabeer on December 12, 2021 at 8:04pm

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब, अच्छी लघुकथा हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on December 12, 2021 at 3:07pm

आदरणीय तेजवीर सिंह जी आदाब, अच्छी मार्मिक लघुकथा हुई है, बधाई स्वीकार करें। सादर। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

बरगद गोद ले लिया

ज़मीन पर पड़ा  अवशेषबरगद का मूल आधार शेष सोचता है आजकल तक था बरगद विशालबरगदी सोच,बरगदी ख्यालबरगदी…See More
4 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post बरगद गोद ले लिया
"आ ०  नाथ सोनांचली जी आपकी  टिप्पणी के लिए  आभार .मुझे  प्रोत्साहन मिला है…"
4 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post बरगद गोद ले लिया
"आ०  चेतन प्रकाश जी  सुप्रभात  आपकी  टिप्पणी और सुझावों के लिए आभारी हूँ…"
5 hours ago
Rakshita Singh commented on Sushil Sarna's blog post आँधियों से क्या गिला. . . . .
"आदरणीय सुशील जी, सादर प्रणाम । बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
5 hours ago
AMAN SINHA posted a blog post

क्या रंग है आँसू का

क्या रंग है आँसू का कैसे कोई बतलाएगा?सुख का है या दु:ख का है ये कोई कैसे समझाएगा?कभी किसी के खो…See More
9 hours ago
नाथ सोनांचली posted a blog post

अर्धांगिनी को समर्पित (दुर्मिल सवैया पर आधारित)

तुम फूल कली तुम चन्द्र मुखी तुम स्वर्ग परी चित चंचल हो तुम लौकिक केवल देह  नहीं  मकरन्द  भरा नव …See More
9 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
9 hours ago
नाथ सोनांचली commented on amita tiwari's blog post बरगद गोद ले लिया
"आद0 अमिता तिवारी जी सादर अभिवादन। बढ़िया सृजन है। बधाई स्वीकार जी"
12 hours ago
नाथ सोनांचली commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बढ़िया दोहा मुक्तक हुआ है। बधाई स्वीकार कीजिये"
12 hours ago
नाथ सोनांचली commented on AMAN SINHA's blog post पश्चाताप
"आद0 अम्न सिन्हा जी सादर अभिवादन बढ़िया सृजन है। बधाई स्वीकार कीजिये"
12 hours ago
नाथ सोनांचली commented on Sushil Sarna's blog post सिन्दूर -(क्षणिकाएँ )
"आद 0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बेहतरीन सृजन,, भाव परक।बधाई स्वीकार कीजिये"
12 hours ago
नाथ सोनांचली commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर गजल -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी सादर अभिवादन बढ़िया माँ को समर्पित रचना है। बधाई स्वीकार कीजिये"
12 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service