For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

2122 2122 2122 2


ज़िन्दगी में हर कदम तेरा सहारा हूँ
नाव हो मझधार तो तेरा किनारा हूँ

तुम भटक जाओ अगर अनजान राहों में
पथ दिखाने को तुम्हें रौशन सितारा हूँ

ज़िन्दगी का खेल खेलो तुम निडरता से
हर सफलता के लिए मैं ही इशारा हूँ

राह जीने की सही तुमको दिखाऊंगा
ज़िन्दगी के सब अनुभवों का पिटारा हूँ

साथ क्यों दूं मैं तुम्हारा सोच मत ऐसा
अंश तुम मेरे पिता मैं ही तुम्हारा हूँ

- दयाराम मेठानी
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 251

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on December 4, 2021 at 12:56pm

"तुम भटक जाओ अगर अनजान राहों में

  पथ दिखाने को तुम्हें रौशन सितारा हूँ"  बहुत ख़ूब। 

आदरणीय दयाराम मेठाणी जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। सादर। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 24, 2021 at 10:10pm

आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन।गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। हार्दिक बधाई।

Comment by Dayaram Methani on November 8, 2021 at 1:38pm

आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 8, 2021 at 11:21am

आदरणीय मेथानी जी बहुतख़ूब कहा...इसके लिए हार्दिक बधाई..सादर

Comment by Dayaram Methani on November 7, 2021 at 9:42pm

आदरणीय निलेश जी, ग़ज़ल पर आपकी टिप्पणी से प्रोत्साहन मिला। आपने जो सुझाव दिया है उसका भविष्य में पूरा ध्यान रखूंगा। वैसे निडरता शब्द इतना अधिक प्रचलित है कि उसका प्रयोग करते वक्त इस ओर ध्यान ही नहीं जाता। आपने मुझे इस बाबत सोचने के लिए प्रेरित किया इस हेतु हार्दिक आभार।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 7, 2021 at 7:26pm

आ. दयाराम मेठानी जी,

ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है ..बधाई स्वीकार करें..
निडरता शब्द पर आश्वस्त नहीं हो पा रहा हूँ.. वह बहुत निडर है // उस में बहुत निडरता है ..कौनसा वाक्य सही लगता है??
दरअसल महानता और निडरता को अनावश्यक रूप से ता लगाकर कहा जाने लगा है .. कहीं जावेद अख्तर साहब की भाषा पर चर्चा में यह सुना था मैंने.. मुझे सही भी प्रतीत हुआ..
अंतिम निर्णय आपका होगा..
पुन; बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (... तमाशा बना दिया)
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार। "
10 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (... तमाशा बना दिया)
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
10 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . .
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, शानदार अंदाज़ में 'दोहा पंचक' के रूप में प्रस्तुत की गयी आपकी…"
11 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post केवल बहाना खोज के जलती हैं बस्तियाँ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, सुंदर भावों से सुसज्जित अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश…"
16 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"//आ. अमीरुद्दीन साहब, अर्थ विपर्यय पुनः हो जाएगा, अब । , और, वही दोष भी क्योकि में अथवा अब दोनों…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पाँच दोहे मेघों पर. . . . .
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, सादर प्रणाम - सृजन पर आपकी आत्मीय सराहना और सुन्दर सुझाव का दिल से आभार ।…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"//ज़माना यहाँ समय के लिए प्रयुक्त किया है। अतः को का प्रयोग उचित नहीं होगा। क्योंकि यहाँ पर कहन का…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"//चलिए, माना, फिर भी, जनाब, 22 ( फैलुन ) पर एक ही साकिन की छूट होगी, 112 तक ही विस्तार मान्य है।…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन हेतु सादर आभार ।"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"जनाब अमित कुमार अमित जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का शुक्रिया।"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"//मैंने कुछ शेरों को ठीक करने का प्रयास किया है आपका मार्गदर्शन चाहूंगा। जानता है जो बखूबी तेरी…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' जी तरही मिसरे पर अति सुंदर गज़ल के लिए हार्दिक बधाई।"
yesterday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service