For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

विदाई के वक़्त बेटी के उद्गार

छोड़ बसेरा  बचपन का  अब, दूजे  घर को जाना है
रीत बनी है इस जग की जो, उसको मुझे निभाना है

लेकिन मन  में प्रश्न  बहुत हैं, उनमें  पापा  खोने दो
पल  भर में मैं  हुई पराई, मुझको  खुल कर रोने दो

घर आँगन  की मधुर सुवासित, पापा मैं कस्तूरी थी
जन्मी थी तो बोले थे तुम, बिटिया बहुत जरूरी थी

कल तक  तेरी  ही गोदी  में, पापा मैं तो सोती थी
तुम्हे न पाती थी जब घर में, मार  दहाड़े  रोती थी

भूल गए क्यों सारी बातें, मुझसे क्यों मुँह मोड़ लिया
पूछ रही हूँ पापा बोलो, क्या  मुझको  है  छोड़ दिया

बचपन वाले मौज भरे दिन, अब न लौट के आएंगे
याद करूँगी जब-जब  तुमको, आँसू  गिरते जायेंगे

चोट लगी जब कभी मुझे तो, पापा तुम भी रोते थे
चाहे जितना थक कर आते, मुझे सुलाकर सोते थे

अधरों पर मुस्कान दिलाती, मैं जादू की पुड़िया थी
पापा  तेरी  सोन  चिरइया, नन्हीं  मुन्नी  गुड़िया  थी

अब इस घर में पापा मेरा, क्या है कोई स्थान नहीं
मैं भी तेरी अपनी ही हूँ, क्या इसका भी भान नहीं

मैं कातर सी हुई मगर क्यों, तुमको आता रोष नहीं
मैं  लड़की  हूँ  इसमें  पापा,  मेरा  कोई  दोष  नहीं

मेरे  हित  तुमने  सारा  ये, निर्णय कैसा कर डाला
चाहे जितना रोऊँ पर क्यों, फ़र्क नहीं पड़ने वाला

बोझ नहीं थी यदि पापा मैं, क्यों तुम मुझसे दूर हुए
दूर भेजने को आख़िर  क्यों, पापा  तुम  मजबूर हुए

भेज रहे हो उस घर में तुम, जिससे हो अंजान बहुत
भगा  रहे  हो घर से अपने, देकर  तुम  सामान बहुत

बिन बोले ही मेरी ख़्वाहिश, कौन समझ अब पायेगा
मैं  रोऊँगी  कौन  वहाँ  फिर,  मुझको  शांत कराएगा

मैं  ढूँढूँगी तुमको पापा, सारे  रस्म - रिवाजों में
ढूँढूँगी   तेरी  आवाजें,  मैं  सबकी  आवाजों में

मुझे मनाने - समझाने को, तुम होंगे अब पास नहीं
मुझे छिपायेगी आँचल में, माँ से भी वह आस नहीं

अब होने जा रही विदा मैं, सब कुछ जैसे टूट रहा
सुबक रहा है  भैया  देखो,  साथ  हमारा छूट रहा

मेरे बिन  माँ  रोयेगी  तो,  उसे  मनाना  पापा  तुम
अगर बिना खाये सोए तो, उसे खिलाना पापा तुम

भूल अगर माँ से हो  जाये,  उसको  डांट  नहीं देना
बिन भूले ही पापा हर दिन, दवा वक़्त पर खा लेना

मेरा क्या मैं तो वह चिड़िया, जिसका यहाँ बसेरा था
लिखा भाग्य में था जितने दिन, उतने दिन ही डेरा था

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 91

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on October 19, 2021 at 9:22pm

आदरणीय सोनंचली जी, भावपूर्ण रचना के लिए बहुत बहुत बधाई। वास्तव मे हर लड़की की विदाई के समय ऐसे ही भाव उठते हैं। 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 17, 2021 at 4:50pm

वाह आदरणीय क्या ही शानदार भावपूर्ण रचना है...बधाई

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on October 17, 2021 at 11:08am
आदरणीय सोनांचली जी इस आकर्षक रचना के लिए बहुत बहुत बधाई, शेष परमादरणीय गुरुदेव समर साहब की बातों पर अमल करें।
Comment by नाथ सोनांचली on October 17, 2021 at 9:13am

आद0 समर कबीर साहब आपको सादर प्रणाम करता हूँ।आपकी रचना पर उपस्थिति ही मेरे लिए आशीर्वाद से कम नहीं है। आपकी बातों को गम्भीरता से लेते हुए रचना को पुनः देखता हूँ। सादर

Comment by Samar kabeer on October 15, 2021 at 7:32am

जनाब नाथ सोनांच्ली जी आदाब , बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना हुई है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें I 

`कल तक  तेरी  ही गोदी  में, पापा मैं तो सोती थी
तुम्हे न पाती थी जब घर में, मार  दहाड़े  रोती थी`

इसके पहले मिसरे में `तेरी` और दूसरे मिसरे में `तुम्हारी ?---`तुम्हे`--"तुम्हें"--`दहाड़े`--"दहाड़ें "

`मैं  ढूँढूँगी तुमको पापा, सारे  रस्म - रिवाजों में
ढूँढूँगी   तेरी  आवाजें,  मैं  सबकी  आवाजों में`---इन मिसरों में भी `तुमको ` और `तेरी`?

कहीं पापा को तू से और कहीं तुम से सम्बोधित किया गया है ये बात रचना को कमज़ोर करती है ,दूसरी बात ये कि कुछ मिसरों में वाक्य विन्यास भी ठीक नहीं है, इस पर ध्यान देने की ज़रूरत है I 

Comment by नाथ सोनांचली on October 14, 2021 at 2:42pm

आद0 नीलेश भाई जी

सादर अभिवादन। रचना पर उपस्थिति और प्रशंसा हेतु बहुत बहुत आभार आपका

Comment by Nilesh Shevgaonkar on October 14, 2021 at 9:48am

आ. सुरेन्द्र भाई,
भावपूर्ण रचना के लिए बधाई 

Comment by नाथ सोनांचली on October 14, 2021 at 7:06am

आद0 अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब सादर अभिवादन।

मेरी रचना पर आपकी उपस्थिति और उत्साह बढ़ाती प्रतिक्रिया से गदगद हूँ। बहुत बहुत आभार आपका

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on October 13, 2021 at 9:54pm

जनाब नाथ सोनांचली जी आदाब, मार्मिक रचना के माध्यम से विदाई के समय बेटी के उद्गार बख़ूबी पेश किए हैं आपने, बधाई स्वीकार करें।  सादर। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-हमारे आँसू
"स्वागत संग आभार आदरणीय धामी जी..."
41 minutes ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"बहुत बहुत आभार आदरणीय धामी जी...सादर"
42 minutes ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"बहुत-बहुत शुक्रिया आ.भाई लक्ष्मण जी मतला यूँ पढ़ें 'ये कहा था उसने मुझको तो बिछड़ते ही मचल…"
1 hour ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
" जी ज़रूर बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय "
1 hour ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"आदरणीय दयाराम मेथानी जी नमस्कार बहुत बहुत शुक्रिया आपका "
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"आ. रिचा जी, गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"जी, सही कहा आपने। मुझ से ही चूक हुई है। सादर"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"आ. भाई दण्डपाणि जी, सादर अभिवादन। गजल का अच्छा प्रयास हुआ है। हार्दिक बधाई। भाई अनिल जी की बात से…"
2 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"धन्यवाद रिचा यादव जी।"
2 hours ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"आदरणीया  Richa Yadav जी सादर नमस्कार ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार…"
3 hours ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"आदरणीय भाई dandpani nahak  जीसादर नमस्कारग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए…"
3 hours ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"आदरणीय भाई  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और…"
3 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service